पेंशनर्स महासंघ ने उच्च स्तरीय समिति की जनपरामर्श उप समिति के अध्यक्ष एम.के. राउत को सौंपा 12 सूत्रीय ज्ञापन
महंगाई राहत (डीआर) दोहरी नीति समाप्त करने कानून बनाने की मांग
रायपुर। भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ ने समान नागरिक संहिता (UCC) के तहत बनाए जाने वाले कानून में पेंशनर्स एवं वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों और हितों को स्पष्ट कानूनी संरक्षण देने की मांग की है। इस संबंध में महासंघ के प्रतिनिधिमंडल ने 25 सितंबर को शाम 4 बजे न्यू सर्किट हाउस, रायपुर के कक्ष क्रमांक 203 में आयोजित बैठक में समान नागरिक संहिता के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति की जनपरामर्श उप समिति के अध्यक्ष श्री एम.के. राउत से मुलाकात कर 12 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा।
बैठक में महासंघ ने ज्ञापन के सभी सुझावों के औचित्य पर विस्तार से चर्चा की तथा विश्वास जताया कि वरिष्ठ नागरिकों, पेंशनर्स एवं उनके परिवारों से जुड़े इन महत्वपूर्ण विषयों को प्रस्तावित समान नागरिक संहिता में समुचित स्थान दिया जाएगा।
बैठक में समान नागरिक संहिता के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति के सदस्य वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मोहन पवार एवं शिक्षाविद् श्रीमती ज्योति सिंह भी उपस्थित रहीं। दोनों ने महासंघ द्वारा प्रस्तुत सुझावों की सराहना करते हुए इन्हें वरिष्ठ नागरिकों एवं पेंशनर्स के हितों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताया।
डीआर भुगतान में दोहरी नीति समाप्त करने की मांग
बैठक में महासंघ ने राज्य के पेंशनर्स को मिलने वाली महंगाई राहत (डीआर) में दोहरी नीति समाप्त करने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। महासंघ ने सुझाव दिया कि सभी राज्य पेंशनर्स एवं परिवार पेंशनर्स को केंद्र सरकार द्वारा घोषित देय तिथि एवं समान दर से महंगाई राहत का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट कानूनी प्रावधान किया जाए।
महासंघ ने कहा कि वर्तमान में भारतीय प्रशासनिक सेवा, बिजली विभाग तथा न्यायिक सेवा के पेंशनर्स एवं परिवार पेंशनर्स को केंद्र के अनुरूप देय तिथि और दर से डीआर का भुगतान किया जाता है, जबकि राज्य के अन्य पेंशनर्स को समान आधार पर भुगतान नहीं मिल रहा है। इस अंतर को समाप्त करने के लिए कानूनी व्यवस्था किए जाने का प्रस्ताव ज्ञापन में शामिल किया गया है।
महासंघ ने समान नागरिक संहिता में वरिष्ठ नागरिकों एवं पेंशनर्स के हितों की विशेष सुरक्षा का प्रावधान करने की मांग की है। वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानपूर्वक जीवन, सुरक्षा एवं भरण-पोषण का स्पष्ट कानूनी अधिकार देने तथा माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल की पारिवारिक जिम्मेदारी को प्रभावी एवं स्पष्ट बनाने का सुझाव दिया गया है।
ज्ञापन में पारिवारिक पेंशन के अधिकार एवं पात्रता को स्पष्ट करने, पति-पत्नी दोनों के निधन के बाद पात्र आश्रितों के पेंशन अधिकारों की सुरक्षा करने तथा पेंशन एवं परिवार पेंशन से जुड़े मामलों में पात्र हितग्राहियों को कानूनी संरक्षण देने की मांग की गई है।
इसी तरह वरिष्ठ नागरिकों के पैतृक एवं स्व-अर्जित संपत्ति तथा उत्तराधिकार के अधिकारों को स्पष्ट एवं सुरक्षित करने, उनकी संपत्ति पर जबरन कब्जा, धोखाधड़ी, दबाव अथवा अनुचित हस्तांतरण से सुरक्षा के प्रभावी प्रावधान करने का सुझाव दिया गया है। पति-पत्नी के बीच संपत्ति एवं उत्तराधिकार संबंधी अधिकारों को भी स्पष्ट रूप से परिभाषित करने की मांग की गई है।
महासंघ ने परिवार में वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, सामाजिक सुरक्षा एवं कानूनी अधिकारों की रक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था तथा पेंशन, पारिवारिक पेंशन एवं सेवानिवृत्ति से जुड़े मामलों के सरल, पारदर्शी और समयबद्ध निराकरण की व्यवस्था करने का सुझाव दिया है। साथ ही अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में त्वरित शिकायत निवारण एवं प्रभावी कानूनी संरक्षण की व्यवस्था की मांग रखी गई है।
महासंघ ने विशेष रूप से सुझाव दिया है कि समान नागरिक संहिता के अंतिम प्रारूप में वरिष्ठ नागरिकों, पेंशनर्स एवं उनके परिवारों के अधिकारों और हितों के लिए स्पष्ट एवं प्रभावी प्रावधान शामिल किए जाएं।
बैठक में भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ के प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव के साथ प्रदेश महामंत्री अनिल गोल्हानी, प्रदेश संगठन मंत्री टी.पी. सिंह, प्रदेश कार्यालय मंत्री बी.आर. रावत तथा जिला रायपुर अध्यक्ष आर.जी. बोहरे उपस्थित रहे।
महासंघ ने कहा कि समान नागरिक संहिता के माध्यम से व्यक्तिगत एवं पारिवारिक अधिकारों में कानूनी स्पष्टता और समानता स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। ऐसे में पेंशनर्स एवं वरिष्ठ नागरिकों के पेंशन, पारिवारिक पेंशन, भरण-पोषण, संपत्ति, उत्तराधिकार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े अधिकारों को भी स्पष्ट कानूनी संरक्षण मिलना आवश्यक है।
महासंघ ने विश्वास व्यक्त किया कि उच्च स्तरीय समिति की जनपरामर्श उप समिति द्वारा प्रस्तुत सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और प्रस्तावित कानून में पेंशनर्स एवं वरिष्ठ नागरिकों के हितों को समुचित स्थान मिलेगा।



















