पंजाब ने लगातार दो ऐसी घटनाओं को देखा, जो अफवाहों और अपुष्ट रिपोर्टों पर आधारित थीं, जिससे राज्य के दो निजी विश्वविद्यालयों के छात्रों में अशांति फैल गई। विरोध प्रदर्शन एक विश्वविद्यालय में दो छात्राओं द्वारा कथित आत्महत्या की अफवाहों के बाद हुए, जबकि दूसरे विश्वविद्यालय में एक हॉस्टलर (छात्रावास में रहने वाली छात्रा) के बलात्कार के आरोपों ने विरोध और हिंसा को जन्म दिया। महत्वपूर्ण बात यह है कि दोनों ही मामलों में कथित पीड़ित अभी तक अज्ञात हैं और इस बात का रत्ती भर भी सबूत नहीं है कि ऐसी कोई घटना कभी हुई भी थी। इन दोनों विरोध प्रदर्शनों का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि ये नेतृत्वहीन थे और प्रदर्शनकारी अत्यधिक भावनात्मक रूप से आवेशित थे। सोशल मीडिया पोस्ट, जिसने अफवाहों को जंगल की आग की तरह फैलाया, से प्रेरित होकर वे स्पष्ट रूप से आश्वस्त थे कि ये घटनाएं वास्तव में हुई थीं।

जंतर-मंतर पर हालिया विरोध प्रदर्शन भी काफी हद तक नेतृत्वहीन था क्योंकि देश भर से छात्र और युवा राष्ट्रीय राजधानी में विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए, जिसके परिणामस्वरूप केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हुआ। पटना, रांची, पुणे और जयपुर जैसे कई शहरों में भी विरोध प्रदर्शन भड़क उठे थे और इन सभी जगहों पर प्रदर्शन स्वत:स्फूर्त और नेतृत्वहीन थे। संयोगवश, हाल के महीनों में श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल में भी इसी तरह के नेतृत्वहीन विरोध प्रदर्शन देखे गए, जिससे उन देशों में सरकारों का तख्तापलट हो गया।

रिपोर्टों के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जन-विरोध के कारणों की जांच करने और ऐसी स्थितियों से निपटने के उपाय सुझाने के लिए एक समिति गठित की थी। यह ज्ञात नहीं है कि सरकार को अभी तक कोई रिपोर्ट सौंपी गई है या नहीं। हालांकि, छात्रों और युवाओं के बीच बढ़ती अशांति देश में एक कठोर वास्तविकता है। यह हालिया विरोध प्रदर्शनों में प्रकट हुई है और आर्थिक, संस्थागत, सामाजिक और सांस्कृतिक कारकों के मिश्रण से उत्पन्न बढ़ती हताशा से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है।

युवाओं के बीच सुलगते असंतोष का सबसे स्पष्ट और वास्तविक कारण रोजगार के अवसरों की कमी है। भारत प्रतिवर्ष लगभग 12 मिलियन युवाओं को कार्यशील आयु वर्ग में जोड़ता है, लेकिन तुलनात्मक रूप से बहुत कम नौकरियां उपलब्ध हैं। बड़ी संख्या में स्नातक छात्रों को या तो अल्प-रोजगार (उनकी योग्यता से कम स्तर की नौकरी) या ऐसी अनुबंध नौकरियों से समझौता करना पड़ता है, जिनमें कोई नौकरी सुरक्षा और करियर में आगे बढऩे के अवसर नहीं होते हैं। डिग्रियां स्पष्ट रूप से उद्योग की जरूरतों के अनुरूप नहीं हैं। हजारों कॉलेजों और विश्वविद्यालयों  द्वारा तैयार किए जा रहे स्नातकों के पास आवश्यक कौशल नहीं है और वे अनिश्चित भविष्य का सामना कर रहे हैं।आग में घी डालने का काम प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की बार-बार आने वाली खबरें और भर्ती, प्रवेश और स्थानीय शासन में भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के आरोप कर रहे हैं। यह सब शिक्षा की उच्च लागत के बावजूद हो रहा है, विशेष रूप से निजी संस्थानों में, और कोचिंग का अतिरिक्त बोझ परिवारों पर वित्तीय भार बढ़ाता है।

हाल के दिनों में विरोध-प्रदर्शनों का पैटर्न स्पष्ट रूप से शिकायतों के निवारण के लिए औपचारिक चैनलों की कमी और छात्रों तथा अधिकारियों के बीच संचार के अभाव को दर्शाता है। यह सुलगता हुआ असंतोष तब तात्कालिक विरोध के रूप में फूट पड़ता है, जो अक्सर उपद्रवी तत्वों द्वारा भड़काई गई हिंसा का रूप ले लेता है। हालांकि अधिकांश संस्थान दावा करते हैं कि उनके पास ऐसे प्लेटफॉर्म हैं जहां छात्र अपनी चिंताएं व्यक्त कर सकते हैं, या जहां मानसिक और करियर से संबंधित परामर्श प्रदान किया जाता है, लेकिन ऐसे प्लेटफॉर्म काफी हद तक उपेक्षित रहते हैं। सभी संस्थानों के लिए छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखने और परामर्शदाता रखने की भी तत्काल आवश्यकता है।

नवीनतम राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो रिपोर्ट के अनुसार, 2014 में 14,488 छात्रों ने आत्महत्या की थी और यह प्रवृत्ति देश में आत्महत्या और आत्महत्या के प्रयासों की बढ़ती संख्या को दर्शाती है। सरकार, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों सहित सभी हितधारकों को युवाओं को प्रभावित करने वाले मुद्दों को हल करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए और उनकी ऊर्जा को सही दिशा में लगाने के तरीके खोजने चाहिएं।-विपिन पब्बी

Advertisement Carousel
Share.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
October 2026
M T W T F S S
 1234
567891011
12131415161718
19202122232425
262728293031