केरल विधानसभा ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने की मांग करते हुए औपचारिक रूप से एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पास किया। इसके साथ ही, केरल देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने भारत निर्वाचन आयोग में सबसे ऊंचे संवैधानिक पद पर बैठे अधिकारी को हटाने के लिए औपचारिक विधायी सिफारिश की है। प्रस्ताव पास होने के बाद मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन ने सोशल मीडिया पर इस फैसले को ऐतिहासिक बताया और कहा कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता से किसी भी हाल में समझौता नहीं किया जा सकता।
मुख्यमंत्री ने गिनाईं 3 मांगें
मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन ने कहा कि इस ऐतिहासिक प्रस्ताव के जरिए केरल ने केंद्र सरकार और देश के सामने तीन स्पष्ट मांगें रखी हैं। पहली मांग योग्य मतदाताओं के वोटिंग अधिकार बहाल करने की है। सतीसन ने कहा कि स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को ठीक किया जाना चाहिए और जिन योग्य मतदाताओं को वोटर लिस्ट से गलत तरीके से हटा दिया गया था, उनके वोटिंग अधिकार तुरंत बहाल किए जाने चाहिए।
दूसरी मांग मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को उनके पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू करने के बारे में है। मुख्यमंत्री के अनुसार, CEC की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठे हैं, जिसके कारण उन्हें हटाने की मांग की जा रही है।
तीसरी मांग चुनाव आयुक्तों के चयन की प्रक्रिया में बदलाव से जुड़ी है। सतीसन ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने वाली चयन समिति के पुनर्गठन की मांग की। प्रस्ताव में समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को शामिल करने का सुझाव दिया गया है।
वोट देने का अधिकार लोकतंत्र की नींव है – मुख्यमंत्री सतीशन
अपने पोस्ट में केरल के मुख्यमंत्री ने कहा कि वोट देने का अधिकार लोकतंत्र की नींव है। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्था को नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। सतीसन ने कहा कि उनका रुख स्पष्ट है कि वोट देने के अधिकार की रक्षा होनी चाहिए, संविधान का सम्मान किया जाना चाहिए और लोकतंत्र को बनाए रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि केरल स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के पक्ष में मजबूती से खड़ा है।



















