कुकी-मैतेई के बाद मणिपुर में जातीय हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। राज्य में कुकी और नागा समुदायों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। ताजा घटनाओं ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था और शांति की कोशिशों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बता दें कामजोंग जिले में संदिग्ध नागा उग्रवादियों के हमले में एक कुकी-जो महिला की मौत हो गई। उसका पति घायल है। वहीं, उनके साथ मौजूद दो अन्य नागरिक लापता बताए जा रहे हैं। दूसरी ओर, कांगपोकपी जिले में एक नागा युवक का कटा हुआ सिर बरामद हुआ है। इन घटनाओं से इलाके में तनाव और ज्यादा बढ़ गया है।
रास्ते में हुआ हमला
बता दें गुरुवार को मणिपुर के कामजोंग जिले में यह हमला हुआ। मृतक महिला की पहचान हतनेइकिम हाओकिप के रूप में हुई है। वह मोलनोई गांव की रहने वाली थीं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, वह अपने पति और दो अन्य लोगों के साथ जरूरी सामान खरीदने के लिए फाइकोह जा रही थीं। इसी दौरान फाइकोह और ऐशु के बीच सड़क पर उन पर हमला किया गया।
हमले में हतनेइकिम की मौत हो गई। उनके पति घायल हो गए। साथ मौजूद दो अन्य नागरिकों का अब तक पता नहीं चल पाया है। इस घटना ने कुकी-जो समुदाय की चिंता बढ़ा दी है।
वहीं फरवरी 2026 में कुकी-नागा झड़पें शुरू होने के बाद से हिंसा में कम से कम 22 नागा और 32 कुकी-जो लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है। गुरुवार की घटना के साथ इस संघर्ष में मारी गई कुकी-जो महिलाओं की संख्या 10 बताई गई है। इनमें दो गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं।
नागा युवक का कटा सिर मिला
मणिपुर में हिंसा के बीच बुधवार देर रात सुरक्षाबलों को कांगपोकपी जिले में नागा युवक अजिनबो रिंगकामाई का कटा हुआ सिर मिला। वह उन चार नागा पुरुषों में शामिल था, जिनकी 10 अक्टूबर को मकुई अशांग गांव में संदिग्ध कुकी उग्रवादियों के हमले में मौत हुई थी।
हमले के दौरान अजिनबो का सिर अलग हो गया था और वह लापता था। उसका बिना सिर वाला शव 11 अक्टूबर को इंफाल स्थित ‘जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज’ (JNIMS) ले जाया गया था। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, सिर घटनास्थल के पास एक सुनसान इलाके में मिला। बाद में उसे पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल लाया गया।
बता दें ‘नागा संगठन जॉइंट ट्राइब्स काउंसिल मणिपुर’ ने सिर की तलाश और उचित अंतिम संस्कार सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था।
गृह मंत्री बोले- सिर्फ सुरक्षा से नहीं रुकेगी हिंसा
मणिपुर के गृह मंत्री गोविंददास कोंथौजम ने गुरुवार को इंफाल के रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में भर्ती 84 बीएसएफ जवानों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि केवल सरकारी प्रयासों और सुरक्षा व्यवस्था से हिंसा खत्म नहीं हो सकती। उन्होंने लोगों से आपसी मतभेद बातचीत के जरिए सुलझाने की अपील की। उनके मुताबिक, समाज और आम नागरिकों को भी गुस्से पर काबू रखने की जरूरत है। सरकार बातचीत शुरू करने की कोशिश कर रही है, लेकिन शांति कायम करने में समाज की भूमिका भी अहम है।
इसी बीच, स्पीयर कॉर्प्स के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कालिया ने मणिपुर में असम राइफल्स की एक अग्रिम चौकी का दौरा किया। उन्होंने सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की और भारत-म्यांमार सीमा की रक्षा कर रहे सैनिकों की तैयारियों की जानकारी ली। लगातार हो रही हिंसा के बीच सबसे बड़ी चुनौती दोनों समुदायों के बीच विश्वास बहाल करना और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।



















