आईटीबीपी डीजी शत्रुजीत कपूर ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों के साथ टकराव को लेकर बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि आज भी भारत और चीन के बीच टकराव की नौबत आती है. डीजी के इस बयान के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है.
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. साथ ही सवाल पूछा है कि सीमा पर जारी तनाव के बावजूद चीन के प्रति यह नरमी और आर्थिक मोर्चे पर बढ़ती निर्भरता आखिर किस तरह का राष्ट्रवाद है?
कांग्रेस ने हमला बोला
जयराम रमेश ने आईटीबीपी डीजी का बयान शेयर करते हुए लिखा, जहां एक तरफ चीन के सामने घुटने टेकने वाले प्रधानमंत्री की ओर से लगातार रियायतें देने का सिलसिला जारी है, इसी बीच ITBP के महानिदेशक ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी PLA के साथ भारतीय सीमा के भीतर हालिया टकरावों में ITBP के प्रदर्शन की सराहना की है, जो बिल्कुल सही भी है. लेकिन प्रधानमंत्री और उनका पूरा तंत्र इस गंभीर मुद्दे पर चुप्पी साधे बैठा है.
ताकसिंग में टकराव के बाद पिछले महीने अरुणाचल प्रदेश के वाचा और दमाई में कोर कमांडर स्तर की बातचीत हुई. स्थानीय लोगों ने बताया है कि लद्दाख की तरह एक बार फिर गश्त के कुछ बिंदु हमारे हाथ से निकल गए हैं. चीन अरुणाचल प्रदेश के हमारे शहरों के नाम बदलता जा रहा है और 60,000 मेगावाट का एक बांध बना रहा है, जो हमारी पारिस्थितिकी और जल सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है.
‘मेक इन इंडिया’ अब ‘इम्पोर्ट फ्रॉम चाइना’ बन गया है’
उन्होंने लिखा, चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 2025-26 में रिकॉर्ड 112 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले साल 99 अरब डॉलर था. इससे कई उद्योगों में हमारे MSME बुरी तरह तबाह हुए हैं. ‘मेक इन इंडिया’ अब ‘इम्पोर्ट फ्रॉम चाइना’ बन गया है. इतना बड़ा व्यापार घाटा हमारी आर्थिक सुरक्षा के लिए भी एक गंभीर चुनौती है.
भारत आज भी 19 जून 2020 को चीन को दी गई प्रधानमंत्री की उस कुख्यात क्लीन चिट की कीमत चुका रहा है. हमारे 20 बहादुर जवानों की शहादत के बाद प्रधानमंत्री ने कहा था, “ना कोई वहां हमारी सीमा में घुस आया है और न ही कोई घुसा हुआ है, न ही हमारी कोई पोस्ट किसी दूसरे के कब्जे में है.
पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे ने खुलासा किया था है कि लद्दाख में चीनी घुसपैठ के दौरान उन्हें केवल यही निर्देश मिला था, “जो उचित समझो वो करो.”
देश सवाल पूछ रहा है
4 जुलाई 2025 को उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने सार्वजनिक रूप से बताया था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के सैन्य अभियान में चीन की भूमिका कितनी व्यापक और गहराई तक फैली हुई थी. लेकिन 25 अगस्त 2026 को पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने सार्वजनिक रूप से लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह के खुलासों का खंडन किया और उसके कुछ ही समय बाद RSS/BJP के इकोसिस्टम के एक प्रमुख थिंक टैंक की कमान संभाल ली. देश सवाल पूछ रहा है: सीमा पर जारी तनाव के बावजूद चीन के प्रति यह नरमी और आर्थिक मोर्चे पर बढ़ती निर्भरता आखिर किस तरह का राष्ट्रवाद है? देश को 56 इंच की छाती के खोखले दावे नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा पर स्पष्ट जवाब चाहिए.



















