PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने GSLV-F18 के सफल प्रक्षेपण और NVS-03 सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजने के लिए ISRO के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई दी है। पीएम मोदी ने इस मिशन को भारत की स्वदेशी उपग्रह नेविगेशन प्रणाली NavIC को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम बताया। उन्होंने कहा कि NVS-03 महत्वपूर्ण तकनीकों में आत्मनिर्भरता हासिल करने के भारत के प्रयासों को आगे बढ़ाएगा और देश के लोगों को बेहतर नेविगेशन सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद करेगा।
भारत की अपनी GPS प्रणाली को मिलेगी नई ताकत, अब दूर होगी सैटेलाइट की कमी
हाल के दिनों में भारत की स्वदेशी जीपीएस प्रणाली ‘नाविक’ को कुछ तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। मार्च 2026 में IRNSS-1F सैटेलाइट की परमाणु घड़ी में आई खराबी और कुछ पुराने उपग्रहों की कक्षीय समस्याओं के कारण सेवाएं प्रभावित हुई थी। भारत द्वारा लगभग 2,250 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की गई इस प्रणाली में वर्ष 2013 से अब तक कुल 11 सैटेलाइट लॉन्च किए गए थे। हालांकि, तकनीकी दिक्कतों के कारण 6 सैटेलाइट ने काम करना बंद कर दिया था और केवल 3 उपग्रह ही पूरी तरह सेवाएं दे पा रहे थे। सटीक लोकेशन डेटा और स्वतंत्र काम के लिए कम से कम 4 सैटेलाइट्स का सक्रिय होना अनिवार्य है। NVS-03 के जुड़ने से अब नाविक सिस्टम फिर से पूरी क्षमता के साथ काम करने में सक्षम होगा।
कारगिल युद्ध के बाद भारत ने क्यों बनाई अपनी नेविगेशन प्रणाली?
भारत ने अपनी स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली NavIC को रणनीतिक जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया था। कारगिल युद्ध के दौरान जब अमेरिका ने भारत को GPS डेटा देने से इनकार कर दिया था, तब भारत ने अपनी स्वतंत्र लोकेशन प्रणाली बनाने का फैसला किया। NavIC के सभी उपग्रह सक्रिय रहने के दौरान इसका फायदा कई क्षेत्रों को मिला। भारतीय रेलवे के 10,400 से अधिक इंजनों की रियल टाइम लोकेशन ट्रैक की जा रही थी। वहीं, समुद्र में 40,000 से ज्यादा मछली पकड़ने वाली नौकाओं को सही रास्ता खोजने और आपातकालीन सुरक्षा अलर्ट हासिल करने में मदद मिल रही थी। इसके अलावा, दुनिया की प्रमुख मोबाइल कंपनियों के 60 से अधिक स्मार्टफोन मॉडल भी NavIC प्रणाली को सपोर्ट करते हैं।
NVS-03 सैटेलाइट की मुख्य विशेषताएं
- स्वदेशी रूबिडियम एटॉमिक क्लॉक: इसमें पूरी तरह मेड-इन-इंडिया परमाणु घड़ी लगाई गई है, जो एकदम सटीक समय और लोकेशन बताएगी।
- नया L1 सिग्नल: इसमें आम नागरिक उपयोग और स्मार्ट डिवाइसेस के लिए नया L1 बैंड सिग्नल जोड़ा गया है।
- सटीक लोकेशन: यह प्रणाली पूरे भारत और देश की सीमाओं से लगभग 1,500 किलोमीटर बाहर तक सटीक लोकेशन, समय और गति की जानकारी देती है।
- उच्च सटीकता: यह भारत के भीतर 10 मीटर और सीमाओं के आसपास 20 मीटर तक की बिल्कुल सटीक लोकेशन देने में सक्षम है।
किन-किन क्षेत्रों में होगा इसका उपयोग?
इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से-
- रक्षा एवं राष्ट्रीय सुरक्षा
- सड़क एवं समुद्री परिवहन व्यवस्था
- आपदा प्रबंधन और राहत कार्य
- मोबाइल फोन और पर्सनल नेविगेशन डिवाइस



















