राजनांदगांव। कोरोना संक्रमणकाल वास्तव में कई मायने में एक सबक साबित हो रहा है। इस दरम्यान कई लोगों ने अपनेपन का पाठ पढ़ा तो कई लोगों का सामना सेवाभाव के एक नए अध्याय से हुआ है। सेवा के क्षेत्र में समर्पित नर्सें आज वह अनुभव कर रही हैं, जो लगभग आठ साल में उन्होंने कभी नहीं किया था। कोरोना टीकाकरण का अवसर उन्हें गर्व का अनुभव करा रहा है। टीकाकरण का अनुभव साझा करते हुए नर्सों ने बताया, कोरोना टीकाकरण की शुरुआत में उनका दिल काफी तेज धड़क रहा था, हाथ कांप रहे थे, लेकिन उत्साह भी बिल्कुल नया ही था, इसलिए सब अच्छा हो गया। कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के लिए राजनांदगांव जिले में 16 जनवरी 2021 से कोरोना टीकाकरण शुरू किया गया है। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा. मिथलेश चौधरी ने बताया, जिले में अब तक 14,323 हेल्थ केयर वर्कर्स और 9,697 फ्रंटलाइन वर्कर्स को कोरोना टीका का पहला डोज तथा 11,527 हेल्थ केयर वर्कर्स और 2,431 फ्रंटलाइन वर्कर्स को दूसरा डोज दिया जा चुका है। इसके अलावा 45 से 59 और 60 वर्ष से ऊपर आयु के 8,827 लोगों का कोरोना टीकाकरण किया जा चुका है। साथ ही लोगों से लापरवाही न बरतने की लगातार अपील की जा रही है। सीएमएचओ डा. चौधरी ने बताया, कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए टीकाकरण के बाद भी लाभार्थियों को मास्क, सैनेटाइजर तथा दो गज की दूरी संबंधी आवश्यक नियमों का अनिवार्य रूप से पालन करने के लिए कहा गया है। जिले में समय-समय पर जांच, जागरुकता अभियान तथा टीकाकरण जैसे विभिन्न प्रयासों के फलस्वरूप कोरोना संक्रमण की गति अब काफी हद तक नियंत्रण में हैं। एक अनजाने डर को हराकर लोग अब स्वस्थ अनुभव कर रहे हैं। वहीं कोरोना टीकाकरण करने वाली नर्सें गौरवान्वित हैं। गर्व इसलिए कि, टीके तो वह लगभग आठ सालों से लगाती आ रही हैं, लेकिन यह पहली बार है, जब उन्हें कोरोना टीकाकरण करने का मौका मिला। देशभर में जहां कोरोना संक्रमण की दहशत देखी गई, वहीं इसी कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए टीका लगाने का अवसर मिलना किसी बड़ी जिम्मेदारी से कम नहीं है।
एकबारगी दिल तेजी से धड़कने लगा था, हाथ कांप रहे थे लेकिन…
शहर के दुर्गादेवी वार्ड में पदस्थ एएनएम ज्योति सिन्हा ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया, टीकाकरण शुरू होने से पहले तक डर भी था। सोचते थे, कोरोना टीका कैसे लगाएंगे लेकिन टीकाकरण से पहले ट्रेनिंग में न सिर्फ कोरोना टीकाकरण की बारीकियां और सावधानियां बताईं गईं बल्कि हौसला अफजाई भी की गई। इसके बाद पहली बार जब कोरोना टीका लगाने की बारी आई तो एकबारगी दिल की धड़कनें बढ़ गई थीं, हाथ भी कांप रहे थे, लेकिन आंखों के सामने जब लोगों की दहशत का दृश्य दिखा तो बाकी सब डर धुंधले पड़ गए और टीकाकरण सफलतापूर्वक हो गया। ज्योति ने बताया, अपने हाथों से वह अब तक लगभग 9,000 लोगों को कोरोना टीका लगा चुकी हैं और किसी में भी कोई प्रतिकूल प्रभाव सामने नहीं आया।
कभी मां जैसी होती हूं तो कभी बेटी या बहन की तरह…
लाल बहादुर शास्त्री वार्ड में सेवारत एएनएम अनुसुईया बोगा कहती हैं, कोरोना टीकाकरण का अवसर मिलना किसी पुण्य-प्रताप के फल से कम नहीं है। खुशी इस बात की है कि कोरोना टीके के दोनों डोज लगवाने के बाद लाभार्थी को प्रतिरोधक क्षमता के रूप में कोरोना से लडऩे की शक्ति मिलती है और खुद को वह स्वस्थ महसूस भी कर रहे हैं। वह बताती हैं, कोरोना टीकाकरण के लिए लोग अब स्वयं आने लगे लगे हैं, जो जागरुकता अभियान का ही नतीजा कहा जा सकता है। अनुसुईया ने बताया, प्रतिदिन उन्हें 200 लोगों के टीकाकरण करने का लक्ष्य मिलता है और यह लक्ष्य सहजता से पूर्ण किया जा सके, यही उनका प्रयास रहता है। टीकाकरण के दौरान उन्हें कई दृश्य दिखते हैं। इस दौरान कभी वह खुद को एक मां की भूमिका में पाती हैं तो कभी बेटी या बहन की और यह भूमिका उन्हें हर बार एक नया-बेहतर अनुभव कराती है।

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