रायगढ़। बरमकेला ब्लॉक के अन्तर्गत बोंदा-पिहरा पहुंच मार्ग की सड़क पर जगह जगह गढ्डे बन गए हैं। इन गढ्ढ़ों पर बरसाती पानी का जमा होकर कीचड़ में तब्दील हो जाता है। यह राह पहली बारिश से ही कीचड़ से लथपथ हो गई है। ऐसे में ग्रामीणों को आवागमन करने में भारी परेशानी का सामना करना पड रहा है। बोंदा-पिहरा पहुंच मार्ग को सात साल पहले प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में शामिल कर पक्की सड़क बनाई गई थी। सडक बनते ही इस पहुंच मार्ग में महानदी के पिहरा घाट पर रेत खदान की चांदी हो गई और दिन रात रेत ढोने वाले ट्रैक्टर तथा डम्पर जैसे वाहनों का रेलमपेल लगा रहा। ऐसे में पक्की सड़क का डामर ज्यादा दिन टिक नहीं पाया। निर्माण ठेकेदार ने इस सड़क की नियमानुसार मरम्मत भी कराई, पर पांच साल बाद यह सड़क पुनः बदहाल हो गई है। यह सड़क स्कूली बच्चों व ग्रामीणों को रोज रोज दिक्कत देती है। नाराज होकर ग्राम पंचायत पिहरा के स्कूली बच्चों ने चक्का जाम भी कर दिया था। मौके पर सरिया पुलिस पहुंची और ग्राम पंचायत को सड़क की मरम्मत कराने को कहा गया। पिहरा पंचायत के तत्कालीन सरपंच ने मरम्मत के नाम पर मुरुम से गढ्ढ़ों को पाट तो दिया, लेकिन कुछ खास राहत नहीं मिली। अब दो साल बाद पाटा गया मुरुम बह गया है और गढ्ढ़ों में पानी भरने के साथ ही तीन किलोमीटर की पूरी सड़क कीचड़ से सराबोर हो जाती है। सड़क में फिसलन होने से बाईक चालकों के लिए खतरनाक साबित हो रही है। बोंदा-पिहरा पहुंच मार्ग से दोनों पंचायत के ग्रामीणों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
नहीं सुन रहे अधिकारी
ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत बोंदा के वार्ड क्रमांक 1 एवं 2 के लोग सबसे ज्यादा इस बदहाल सड़क से परेशान हैं। एक मात्र पिहरा मार्ग से इनके घर के दरवाजे खुलते हैं और घर से बाहर कदम रखते ही कीचड़ मिलता है। ऐसे में बाहर आना जाना मुश्किल हो गया है। प्रशासनिक अधिकारियों को गुहार लगाई गई, किंतु कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
क्या कहती है सरपंच
ग्राम पंचायत बोंदा की सरपंच सीता बाई सिदार ने कहा कि सड़क की मरम्मत कराने के लिए मद नहीं है। योजना के अधिकारियों को ध्यान देना चाहिए। फिर भी जनपद के अधिकारियों से बात कर मुरुम वगैरह डलवा देगें।
कीचड़ से पट पड़ी हैं राहें, बोंदा-पिहरा पहुंच मार्ग पर चलना हुआ दुश्वार
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