रायपुरवासियों के लिए यह गौरव की बात है कि इस धरा पर स्वामी विवेकानंद ने अपने बचपन का सबसे ज्यादा समय बिताया। बचपन में वे राजधानी की मालवीय रोड से बूढ़ा तालाब की ओर जाने वाली सड़क पर स्थित डे भवन में ही दिन-रात बिताया और पढ़ाई की। इतिहासकारों की मानें तो इस मकान में आज भी उनकी उपयोग की गई वस्तुएं सुरक्षित हैं। जब स्वामी जी यहां आए थे, तब स्वामी विवेकानंद की उम्र 14 वर्ष की थी। वे मेट्रोपोलिटन विद्यालय की तीसरी कक्षा (आज की कक्षा आठ के समकक्ष) में पढ़ रहे थे। स्वामी विवेकानंद अपने पिता विश्वनाथ के साथ 1877 में यहां आए थे। स्वामी जी के पिता पेशे से वकील थे। वकालत के कार्य से रायपुर आए थे और अपने दोस्त राय बहादुर डे के यहां ठहरे हुए थे।बाद में स्वामी जी के पिता ने अपने परिवार के सभी सदस्यों को रायपुर बुलाने की सोची। फिर स्वामी विवेकानंद अपने छोटे भाई महेन्द्र दत्ता, बहन जोगेंद्रबाला और मां भुवनेश्वरी देवी को रायपुर ले आए थे।स्वामी विवेकानंद का बचपन रायपुर के जिस डे भवन में बीता था, उसे सहेजने का कार्य सरकार करने जा रही है। रायपुर के बूढ़ापारा स्थित डे भवन को ऐतिहासिक धरोहर के रूप में स्थापित किया जाएगा और इसे स्थायी संग्रहालय के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार की केबिनेट फैसला लिया है।

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