रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र, रायपुर द्वारा राष्ट्रीय मत्स्य कृषक दिवस के अवसर पर आज यहां पांच दिवसीय ‘‘गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम’’ का शुभारंभ किया गया। शुभारंभ कार्यक्रम के मुख्य अतिथि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. एस.के. पाटील थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में कलेक्टर रायपुर श्री सौरभ कुमार, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत रायपुर श्री मयंक चतुर्वेदी तथा इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय प्रबंध मण्डल के सदस्य श्री आनंद मिश्रा उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता निदेशक विस्तार सेवाएं डाॅ. एस.सी. मुखर्जी ने की। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के मत्स्य कृषक शामिल हुए हैं। शुभारंभ समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि डाॅ. एस.के. पाटील ने कहा कि बदलते परिवेश में कृषि व्यवसाय अधिक चुनौतीपूर्ण होने के साथ ही अधिक महत्वपूर्ण बन गया है। आज के समय में केवल परंपरागत खेती से काम नहीं चलेगा बल्कि किसानों को खेती के साथ ही कृषि से संबद्ध अन्य व्यवसायों जैसे पशुपालन, मछली पालन, डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण आदि को भी अपनाना पडे़गा। उन्होंने कहा कि सहायक व्यवसाय के रूप में मछली पालन किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। छत्तीसगढ़ में मछली पालन की असीम व्यवसायिक संभावनाएं हैं। उन्हांेने कहा कि बायोफ्लाॅक तकनीक के द्वारा किसान एवं अन्य युवा उद्यमी कम स्थान, कम लागत तथा नियंत्रित परिस्थितियों में टंकियों में मछली पालन कर सकते हैं। इस विधि में मत्स्य बीज भी कम लगता है और अधिक उत्पादन प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केन्द्र रायपुर सहित अन्य कृषि विज्ञान केन्द्रों के माध्यम से इस तकनीक का प्रसार किसानों तक किया जा रहा है। उन्होंने कृषि विज्ञान केन्द्र रायपुर को जिला प्रशासन की विभिन्न योजनाओं के तहत सहयोग प्रदान करने के लिए कलेक्टर श्री सौरभ कुमार तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मयंक चतुर्वेदी के प्रति आभार व्यक्त किया। कलेक्टर श्री सौरभ कुमार ने इस अवसर पर कहा कि रायपुर जिले में कृषि तथा संबद्ध व्यवसायों विशेषकर मछली पालन के विकास की व्यापक संभावनाएं है। उन्होंने युवाओं से कृषि के क्षेत्र में नवाचार करने का आव्हान किया। उन्होंने कृषि विज्ञान केन्द्र रायपुर को विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए जिला प्रशासन की ओर से हर संभव सहयोग देने का आश्वासन दिया। जिला पंचायत रायपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मयंक चतुर्वेदी ने कहा कि जिला पंचायत रायपुर द्वारा कृषि विज्ञान केन्द्र रायपुर के साथ मिलकर पांच तालाबों में मछली पालन का कार्य प्रारंभ किया गया है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के प्रबंध मण्डल सदस्य श्री आनंद मिश्रा ने कहा कि कोरोना संक्रमण काल में गांवों और कृषि का महत्व स्थापित हुआ है। लाॅकडाउन के दौरान जब सारे उद्योग, व्यवसाय और सेवाएं बंद थी उस समय केवल कृषि तथा सहायक व्यवसाय ही संचालित हो रहे थे। उन्होंने छत्तीसगढ़ में मछली पालन की व्यापक संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए मत्स्य उत्पादन बढ़ाने तथा मछली के उत्पाद तैयार करने पर जोर दिया। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक विस्तार डाॅ. एस.सी. मुखर्जी ने बताया कि 10 जुलाई 1957 को मत्स्य वैज्ञानिक डाॅ. हीरालाल चैधरी ने पहली बार मछलियों की सफल ब्रीडिंग की थी तब से इस दिन को मत्स्य कृषक दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने विभिन्न कृषि विज्ञान केन्द्रों द्वारा संचालित योजनाओं एवं गतिविधियों की जानकारी दी। कृषि विज्ञान केन्द्र रायपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डाॅ. गौतम राॅय ने कृषि विज्ञान केन्द्र रायपुर की योजनाओं एवं गतिविधियों की जानकारी दी। मत्स्य वैज्ञानिक डाॅ. सौगत ससमल ने मत्स्य बीज उत्पादन, रंगीन मछली पालन एवं बायोफ्लाॅक तकनीक के बारे में जानकारी दी। कलेक्टर श्री सौरभ कुमार एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मयंक चतुर्वेदी ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय एवं कृषि विज्ञान केन्द्र, रायपुर द्वारा क्रियान्वित विभिन्न योजनाओं जैसे बायोफ्लाॅक मछली उत्पादन तकनीक, रंगीन मछली पालन, मखाना उत्पादन आदि का अवलोकन भी किया। इस अवसर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अनेक वरिष्ठ वैज्ञानिक उपस्थित थे।
किसानों की आय बढ़ाने में मछली पालन की महत्वपूर्ण भूमिका: डाॅ. पाटील
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