प्रतापगढ़। चातुर्यमास के पावन अवसर पर रामानुज आश्रम संत रामानुज मार्ग पर झारखंड राज्य के राज्य निर्वाचन आयुक्त नरसिंह नारायण पांडे आई ए एस अपनी अर्धांगिनी नीलम पांडेय के साथ पधारे। उक्त अवसर पर भगवान रामानुज स्वामी के विषय में काफी चर्चा हुई। ओम प्रकाश अनिरुद्ध रामानुज दास ने कहा कि वरदराज भगवान ने कांची पूर्ण स्वामी के द्वारा रामानुज स्वामी भगवान को उपदेश दिया था कि मैं ही परम तत्व हूं। जीव और ब्रह्म में भेद है। प्रपत्ति ही मोक्ष का साधन है। शरणागत को मैं इसी जन्म में ही मोक्ष प्रदान करता हूं। यदि मृत्यु के समय वह मुझे किसी कारणवश याद नहीं कर पाता तो भी मैं उसे बैकुंठ धाम को प्रदान करता हूं । रामानुज स्वामी भगवान के लिए कहा कि महा पूर्ण स्वामी का आश्रयण करें। जो भी रामानुज से संबंध रखेगा वह मेरे बैकुंठ धाम को प्राप्त करेगा। इसी बात को भगवान ने गीता में कहा है कि अर्जुन जो देवताओं की पूजा करेगा वह देवताओं को प्राप्त होगा, जो पितरों की पूजा करेगा वह पितरों को प्राप्त होगा, जो प्रेतों की पूजा करेगा वह प्रेतों को प्राप्त होगा, और जो मेरी पूजा करेगा मुझे प्राप्त होगा। दास एवं नारायणी रामानुज दासी द्वारा श्री पांडे जी को अंगवस्त्रम से सम्मानित कर रामानुज पंचांगम प्रदान किया गया ।उक्त अवसर पर नारायणी रामानुजदासी, राकेश सिंह, रामनरेश पांडे रामानुज दास, ज्ञानेश्वर तिवारी रामानुज दास, आचार्य कमलेश तिवारी ,गिरीश दत्त मिश्रा ,डॉ अवंतिका पांडे वैदेही शुक्ला , इं अनामिका , डॉ अंकिता,विश्वम पांडेय ,घनश्याम पांडेय सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
प्रपत्ति ही मोक्ष का साधन : ओमप्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास
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