कबीरधाम। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर बालिकाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरुक करने तथा मानसिक समग्र विकास के लिए जिले के सभी विकासखंडों में विभिन्न प्रेरक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस दौरान बालिकाओं ने चित्रकला तथा रंगोली के माध्यम से चुनौतियों व अधिकारों के संरक्षण से संबंधित विषयों को रेखांकित किया। साथ ही स्पर्धा के विजेताओं को पुरस्कृत भी किया गया।
हर साल 11 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है, ताकि बालिकाओं के सामने आने वाली चुनौतियों और उनके अधिकारों के संरक्षण के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके। इसी क्रम में इस वर्ष भी बालिका दिवस के अवसर पर जिले में विभिन्न प्रेरक कार्यक्रम आयोजित किए गए। जिले के चारो विकासखंडों में स्कूल, कॉलेज आदि में बालकाओं के लिए रंगोली, चित्रकला, भाषण व प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गई। पंडरिया विकासखंड के बीएमओ डॉ. बीएल राज ने बताया, बालिका दिवस के अवसर पर शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में बारहवीं कक्षा की छात्राओं के मध्य बालिकाओं के स्वास्थ्य विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई। स्पर्धा में छात्राओं ने एक से बढ़कर एक प्रेरक चित्र बनाकर बालिकाओं के स्वास्थ्य को रेखांकित करते हुए विभिन्न रोगों की रोकथाम के लिए जागरुक करने का प्रयास किया। उत्कृष्ट व संबंधित विषय पर सारगर्भित चित्रकारी के लिए अनिता आदिले, ईशा भास्कर, नीतू कुर्रे और प्रियंका चंद्रवंशी को पुरष्कृत किया गया। कार्यक्रम में स्कूल के शिक्षकों के साथ स्वास्थ्य विभाग की ओर से बीपीएम संगीता भगत, बीडीएम भास्कर देवांगन, जेम्स जॉन व सुखदेव मिश्रा समेत अन्य मौजूद रहे।
इस संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शैलेन्द्र कुमार मंडल ने बताया, बालिकाओं के शारीरिक व मानसिक समग्र विकास के लिए शासन द्वारा बालिका दिवस मनाने का निर्णय लिया गया था। इस अवसर पर जिले के चारों विकासखंडों में स्कूल व कॉलेज आदि में बालकाओं के लिए रंगोली, चित्रकला, भाषण, प्रश्नोत्तरी जैसी विभिन्न प्रेरक प्रतियोगिताएं आयोजित की गई, जिसमें छात्राओं ने अपनी तर्कशक्ति का सराहनीय परिचय दिया है।
इसलिए मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस
अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस 11 अक्टूबर को मनाया जाता है। दुनियाभर की बालिकाओं की आवाज को सशक्त करने तथा महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों व उनके अधिकारों के संरक्षण के बारे में जागरुकता लाने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। यह दिन इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह लिंग-आधारित चुनौतियों को समाप्त करता है जिसका सामना दुनिया भर में अमूमन लड़कियां करती हैं, जिसमें बाल विवाह, उनके प्रति भेदभाव और हिंसा शामिल है। इस खास दिन पर परिवार, समाज और देश के लिए बालिकाओं के महत्व को दर्शाया जाता है। इसके साथ ही यह संदेश दिया जाता है कि बालिकाओं की क्षमताओं और शक्तियों को पहचान कर उनके लिए बेहतर अवसर प्रदान कराने चाहिए। देश में 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने की शुरुआत 2009 से की गई। सरकार ने इसके लिए 24 जनवरी का दिन चुना गया है। यही वह दिन था जब 1966 में इंदिरा गांधी ने भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली थी।
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