शरद पूर्णिमा तिथि बुधवार रात 8:26 बजे तक रहेगी, ऐसे में देश के कई इलाकों में लोग आज भी व्रत रखते हुए शुभ मुहूर्त में पूजा कर मनोकामना मांगेंगे. आइए जानते हैं शरद पूर्णिमा का महत्व और उपयोगिता. शरद पूर्णिमा आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को कहा जाता है. ज्योतिषाचार्यों की मानें तो यह रात चंद्रमा सोलह कलाओं से परिपूर्ण होती है. इस दिन चंद्रमा से निकलने वाली किरणें अमृत समान होती हैं. इस साल पंचांग भेद होने के कारण यह पर्व दो दिन मनाया जाएगा, ऐसे में पूर्णिमा 19-20 अक्टूबर दोनों तारीखों में मनेगी. कुछ जगहों पर पूर्णिमा व्रत 20 अक्टूबर को रखा जा रहा है.

रात को भ्रमण के लिए निकलती हैं लक्ष्मीजी
शरद पूर्णिमा का दिन मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने का खास दिन माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी रात में भम्रण पर निकलती हैं, ऐसे में उनके स्वागत के लिए कई जगह लोग घरों के दरवाजे खोलकर रखते हैं, जबकि कुछ मान्यताओं के मुताबिक खुले आकाश में खीर या कोई मिष्ठान रखा जाता है, जिसे अगले दिन खाने पर रात में हुई अमृत वर्षा के असर से शरीर निरोग रहता है.

शरद पूर्णिमा व्रत पूजन विधि
सुबह जल्दी उठकर व्रत का संकल्प लें. इसके बाद पवित्र नदी या कुंड में स्नान करें. स्वच्छ कपड़े पहनकर ईष्टदेव की पूजा करें. भगवान को गंध, अक्षत, तांबूल, दीप, पुष्प, धूप, सुपारी, दक्षिणा अर्पित करें. रात्रि को गाय के दूध से खीर बनाएं और आधी रात को भगवान को भोग लगाएं. रात को खीर से भरा बर्तन चांद की रोशनी में रखकर दूसरे दिन ग्रहण करें. यह खीर प्रसाद के रूप में सभी को वितरित करें.

शुभ मुहूर्त
पूर्णिमा तिथि 19 अक्टूबर की शाम 07 बजे से 20 अक्टूबर 2021 की रात 08 बजकर 26 मिनट पर खत्म होगी.

इनका ध्यान रखना जरूरी
– शरद पूर्णिमा के दिन फल-जल लेकर व्रत रखा जा सकता है, लेकिन भोजन सात्विक ही ग्रहण करना चाहिए.
– इस दिन काले रंग के कपड़े पहनने से बचें. सफेद कपड़े ही धारण करना शुभ है. शरद पूर्णिमा के दिन व्रत कथा अवश्य सुननी चाहिए.

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