हिंदू धर्म में कार्तिक पूर्णिमा का विशेष महत्व है. इस दिन स्वर्गलोक से सभी देवी-देवता पृथ्वीलोक पर आते हैं और वाराणसी के गंगा घाट पर स्नान करते हैं. इस दिन देव दिवाली मनाई जाती है. देवों के धरती के आने की खुशी में घाटों को दीयों से रोशन किया जाता है. इतना ही नहीं, इस दिन घर के अंदर और बाहर दीप जलाने के परंपरा है. इस साल कार्तिक पूर्णिमा 19 नवंबर के दिन मनाई जाएगी. इस दिन व्रत, पूजा-पाठ आदि का विशेष महत्व है. इतना ही नहीं, दीप दान और दान आदि का भी बहुत महत्व है. कहते हैं इस दिन दान आदि करने जो पुण्य मिलता है वो इस जन्म और अगले जन्म में भी मिलता है. कार्तिक पूर्णिमा के दिन तुलसी पूजा का भी विशेष महत्व है. तुलसी जी को मां लक्ष्मी का रूप माना जाता है और कार्तिक मास में तुलसी पूजा का महत्व और अधिक बढ़ जाता है. लेकिन कार्तिक पूर्णिमा के दिन की गई तुलसी पूजा का फल कई सौ गुना मिलता है. आइए जानते हैं कार्तिक पूर्णिमा के दिन तुलसी पूजा, पूर्णिमा व्रत, दीपदान और दान आदि का क्या महत्व है.
दीपदान: पुराणों के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दिवाली मनाई जाती है. कहते हैं कि इस दिन देवता गंगा घाट पर आकर स्नान करते हैं. धरती पर देवताओं के आने की खुशी में पूरे घाट को दीपों से सजाया जाता है. इसलिए इस दिन दीपदान का विशेष महत्व है. कहते हैं कि इस दिन नदी और तालाब में स्नान करने से समस्त संकटों का नाश होता है. इतना ही नहीं, कर्ज से मुक्ति मिलती है. कार्तिक पूर्णिमा के दिन घर के मुख्य गेट पर आम के पत्तों की तोरण बांधे और दीपावली की ही तरह घरों में दीप जलाएं.
तुलसी पूजा: कार्तिक पूर्णिमा के दिन तुलसी जी के साथ शालीग्राम की भी पूजा की जाती है. इस दिन तुलसी पूजा का विशेष महत्व है. कहते हैं कि इस दिन तुलसी के आगे दीप जलाने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. और घर की दरिद्रता दूर होती है.
पूर्णिमा का व्रत: कार्तिक पूर्णिमा के दिन व्रत रख भगवान का स्मरण और चिंतन आदि करने से अग्निष्टोम यज्ञ के समान फल की प्राप्ति होती है. इतना ही नहीं, ये भी मान्यता है कि इस दिन पूर्णिमा का व्रत रखने से सूर्यलोग की प्राप्ति होती है. कहते हैं कि कार्तिक पूर्णिमा से शुरू करते हुए सभी पूर्णिमा का व्रत करने से सभी मनोकामनाओं की पूरी होती है.
दान का महत्व: मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन दस यज्ञों के समान फल प्राप्त होता है. कार्तिक पूर्णिमा के दिन अपनी सामर्थ्य अनुसार अन्न दान, वस्त्र दान और अन्य जो भी दान कर सकते हैं करना चाहिए. इससे घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है.

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