इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में मनाया गया कृषि शिक्षा दिवस

देश के प्रथम राष्ट्रपति एवं प्रथम कृषि मंत्री डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद को याद किया गया

रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में आज यहां कृषि शिक्षा दिवस मनाया गया। कृषि महाविद्यालय रायपुर के स्वामी विवेकानंद सभागार में कृषि शिक्षा दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. एस.एस. सेंगर थे। डाॅ. सेंगर ने कहा कि भारत में कृषि शिक्षा का विशेष महत्व एवं असीम संभावनाएं है। देश के विकास में कृषि शिक्षा की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि भारत की आबादी के अनुपात में यहां कृषि स्नातकों एवं कृषि वैज्ञानिकों की संख्या विकसित देशों की तुलना में बहुत कम है अतः देश में कृषि शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए नये कृषि महाविद्यालय खोलने तथा उपलब्ध सीटों की संख्या में बढ़ोतरी किये जाने की आवश्यकता है। डाॅ. संेगर ने इस अवसर पर देश के प्रथम राष्ट्रपति एवं स्वतंत्र भारत के प्रथम कृषि मंत्री भारत रत्न डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद का पुण्य स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किये। उल्लेखनीय है कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा देश के प्रथम कृषि मंत्री डाॅ. राजेन्द्र प्रसाद के जन्म दिवस 3 दिसम्बर को कृषि शिक्षा दिवस के रूप में मनाया जाता है। कृषि शिक्षा दिवस के आयोजन का उद्देश्य शालेय एवं महाविद्यालयीन विद्यार्थियों में कृषि एवं संबंधित विज्ञानों में शिक्षा के प्रति रूचि जागृत करना एवं कृषि विषय को उनके व्यवसाय एवं अनुसंधान कैरियर के रूप में चुनने हेतु प्रोत्साहित करना है। डाॅ. सेंगर ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कृषि शिक्षा के क्षेत्र में काफी अच्छा काम हुआ है। राज्य निर्माण के समय यहां केवल एक कृषि महाविद्यालय था जबकि आज यहां 31 कृषि महाविद्यालय, 11 उद्यानिकी महाविद्यालय, 4 कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय, 1 वानिकी महाविद्यालय एवं 1 खाद्य प्रौद्योगिकी महाविद्यालय संचालित है। इन महाविद्यालयों में प्रति वर्ष तीन हजार से अधिक विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में 74 कृषि विश्वविद्यालय संचालित है जहां से प्रति वर्ष लगभग 25 हजार कृषि स्नातक शिक्षा प्राप्त कर के निकल रहे हैं। भारत की आबादी के अनुपात में कृषि स्नातकों की संख्या बहुत कम है। कृषि वैज्ञानिकों की संख्या तो और भी कम है जिसकों बढ़ावा दिये जाने की जरूरत है। उन्होंने कृषि छात्रों को उद्यमिता विकास, नवाचार एवं स्व-रोजगार से जोड़ने पर बल दिया। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलसचिव श्री जी.के. निर्माम ने इस अवसर पर कहा कि समग्र विकास की परिकल्पना में कृषि का महत्वपूर्ण स्थान है। कृषि के विकास के बगैर देश का समग्र विकास संभवन नहीं है। कृषि शिक्षा, कृषि अनुसंधान तथा नवनी कृषि प्रौद्योगिकी के प्रसार को बढ़ावा देकर समग्र विकास को नये आयाम दिये जा सकते हैं। कृषि महाविद्यालय रायपुर के अधिष्ठाता डाॅ. एम.पी. ठाकुर ने इस असवर पर कहा कि भारत में कृषि शिक्षा के व्यापक अवसर उपलब्ध हैं। यहां विभिन्न विश्वविद्यालयों में कृषि संबंधित अनेकों पाठ्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं जहां छात्र अपनी रूचि के अनुरूप पाठ्यक्रमों को चयन कर शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं। कृषि छात्रों के लिए राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अनेक छात्रवृत्तियां भी उपलब्ध है। देश में कृषि स्नातकों की कमी होने के कारण उनके लिए बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर भी उपलब्ध हैं। इस अवसर पर निदेशक प्रक्षेत्र एवं बीज डाॅ. पी.एल. चन्द्राकर एवं सह संचालक अनुसंधान डाॅ. विवेक त्रिपाठी सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक, वैज्ञानिक एवं बड़ी संख्या में छात्रगण उपस्थित थे।

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