रायगढ़ । कृषि विभाग में खींचतान थमने का नाम ही नहीं ले रही है। कुर्सी से हटाए जाने के करीब एक महीने बाद डीडीए एलएम भगत वापस लौट आए हैं। काम से नाखुश कलेक्टर ने उन्हें हटाकर संयुक्त कलेक्टर को प्रभार दे दिया था। बुधवार को डीडीए एलएम भगत ने मंत्रालय से मौखिक चर्चा का हवाला देते हुए वापस ज्वाइन कर लिया है। राजीव गांधी किसान न्याय योजना समेत कई कार्यों में लापरवाही की वजह से कलेक्टर भीम सिंह ने डीडीए एलएम भगत को निशाने पर रखा था। लंबे समय से नाराज चल रहे कलेक्टर ने सात नवंबर को टीएल के बाद डीडीए को हटाकर ज्वाइंट कलेक्टर डिगेश पटेल को उप संचालक कृषि का प्रभार सौंप दिया था। एक-दो दिन तक तो श्री भगत दफ्तर आते रहे। लेकिन बाद में उन्होंने मंत्रालय से मार्गदर्शन मांगा। इस बीच संयुक्त कलेक्टर ने चार्ज ले लिया। एक महीने से कृषि विभाग का काम शांति से चल रहा था लेकिन बुधवार को अचानक डीडीए एलएम भगत वापस पहुंच गए। सुबह उन्होंने उप संचालक कार्यालय पहुंचकर कुर्सी संभाल ली। पता चला कि उन्होंने मंत्रालय में रायगढ़ कार्यालय की स्थिति के बारे में चर्चा की। वहां से कहा गया कि पूर्व में हुए तबादले पर हाईकोर्ट में स्टे है। इसके बाद मंत्रालय ने कोई तबादला आदेश नहीं निकाला है। इसलिए आगामी आदेश या हाईकोर्ट के आदेश तक डीडीए भगत के पास ही चार्ज रहेगा लेकिन इस बारे में कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया गया है।मौखिक चर्चा के बाद एलएम भगत ने रायगढ़ दफ्तर में वापसी कर ली है। इसके बाद कलेक्टोरेट में लोग चटखारे लेकर इस बारे में चर्चा कर रहे हैं। कलेक्टर लेंगे कोई फैसला दरअसल श्री भगत के इस तरह कलेक्टर के आदेश के विरुद्ध वापस डीडीए की कुर्सी संभालने से जिले में प्रशासनिक संतुलन गड़बड़ा गया है। बुधवार को कलेक्टर दौरे पर थे। उन्हें इस बात की जानकारी दी गई है। शायद वे इस मामले में आगे कोई फैसला ले सकते हैं। इस मामले में राज्य शासन का ढुलमुल रवैया भी जिम्मेदार है। स्टे ऑर्डर के विरुद्ध शासन ने जवाब ही नहीं दिया है। वहीं पुराने तबादला आदेश को संशोधित भी नहीं किया। अगर दोनों में से कोई भी विकल्प चुना जाता तो मामला इतना लंबा न खिंचता।

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