नई दिल्ली। भारतीय रेलवे एशिया का दूसरा और दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है. यहां रोजाना करीब 10 करोड़ लोग ट्रेन में सफर करते हैं. अगर आपने भी कभी रेल यात्रा की है तो देखा होगा कि ट्रेन की बोगियों में दरवाजे के पास वाली खिड़की बाकी सभी से अलग होती है. ट्रेन के एसी कोच को छोड़कर सभी स्लीपर और जलरल कोच की खिड़कियों में सरिया लगी रहती हैं, लेकिन दरवाजे के पास वाली खिड़की पर सामान्य से ज्यादा सरिया लगी होती हैं. इसकी खास वजह भी है. आइए बताते हैं.
चोरी से बचाने के लिए लगाई जाती हैं ज्यादा सरिया
दरअसल, दरवाजे के पास वाली खिड़की में चोरी होने का डर सबसे ज्यादा होता है. चोर अक्सर इन खिड़कियों मे हाथ डालकर सामान चुरा लेते थे. क्योंकि इन खिड़कियों तक दरवाजे के पायदान से भी पहुंचा जा सकता है. रात के समय जब सभी यात्री सो रहे होते हैं, तब चोर इन खिड़कियों के जरिए आसानी से सामान चुरा लेते थे. इस समस्या से निजात पाने के लिए ही इन खिड़कियों में सामान्य से अधिक सरिया लगा दिया गया. ज्यादा सरिया होने की वजह से गैप इतना कम हो गया कि खिड़की में हाथ घुस नहीं सकता है. इसके साथ ही ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि रात में आउटर में गाड़ी रुकने के दौरान चोर खिड़की से हाथ डालकर दरवाजा न खोल पाएं.रेलवे अधिकारियों के मुताबिक पहले ट्रेन की खिड़कियां एक जैसी ही हुआ करती थीं. लेकिन रेलवे को शिकायतें मिल रही थी कि चोर उचक्के दरवाजे के पास खड़े हो जाते हैं और जैसे ही ट्रेन चलनी शुरू होती है वो खिड़की से हाथ डालकर महिलाओं के गहने या कीमती चीजें लूट कर भाग जाते हैं. उसके बाद ही रेलवे ने सुरक्षा की दृष्टि से दरवाजे के पास वाली खिड़की के ग्रिल पर ज्यादा संख्या में सरिया लगाकर ग्रिल को काफी घना कर दिया.

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