भारत के पड़ोसी देश नेपाल से एक टेंशन देने वाली खबर सामने आई है। एक अध्ययन के अनुसार दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत शिखर माउंट एवरेस्ट की सबसे चोटी पर जमी सदियों पुरानी बर्फ अब तेजी से पिघलती जा रही है, जो आने वाले वक्त में किसी खतरे की घंटी साबित हो सकती है। एक नई स्टडी में इसको लेकर हैरान कर देने वाला खुलासा हुआ है। हाल ही में सामने आई नई स्टडी के मुताबिक माउंट एवरेस्ट के शिखर के पास एक ग्लेशियर पर बर्फ, जिसे बनने में सहस्त्राब्दी यानी हजारों साल का समय लगा। अब वो जलवायु परिवर्तन की वजह से पिछले तीन दशकों में सिकुड़ती (पिघलती) जा रही है। यूनिवर्सिटी ऑफ मेन के नेतृत्व में और नेचर की तरफ से इस हफ्ते प्रकाशित किए गए शोध के अनुसार पिछले 25 सालों में दक्षिण कर्नल ग्लेशियर पहले ही अपनी लगभग 55 मीटर (180 फीट) मोटाई खो चुका है।
80 गुना तेजी से पिघल रही बर्फ
प्रमुख वैज्ञानिक पॉल मेवेस्की ने नेशनल ज्योग्राफिक को बताया कि अध्ययन में कहा गया है कि कार्बन डेटिंग से पता चला है कि बर्फ की ऊपरी परत लगभग 2,000 साल पुरानी थी, जिससे पता चलता है कि ग्लेशियर बनने में लगने वाले समय की तुलना में 80 गुना तेजी से पतला हो रहा है। उस रेट के हिसाब से साउथ कर्नल शायद बहुत कुछ दशकों के भीतर गायब होने जा रहा है।
एवरेस्ट खो रही तेजी से अपनी बर्फ
इसी के साथ अन्य शोधकर्ताओं ने दिखाया है कि हिमालय के ग्लेशियर भी तेजी से पिघल रहे हैं। ऐसे में जैसे-जैसे ग्लेशियर सिकुड़ते हैं, हिमालय के पहाड़ों की तलहटी में सैकड़ों झीलें बन जाती हैं, जो फट सकती हैं और बाढ़ के जरिए तबाही ला सकती हैं। वहीं 1994 के बाद से रिकॉर्ड 25 बार एवरेस्ट पर चढ़ने वाले नेपाली पर्वतारोही कामी रीता शेरपा ने न्यूज एजेंसी एएफपी को बताया कि उन्होंने पहाड़ पर पहली बार बदलाव देखा है। बकौल शेरपा “अब हम उन क्षेत्रों में चट्टान को उजागर होते हुए देखते हैं, जहां पहले बर्फ हुआ करती थी। एवरेस्ट पर ही नहीं, अन्य पहाड़ भी अपनी बर्फ खो रहे हैं। यह चिंताजनक है।”
6 वैज्ञानिकों की टीम ने इकट्ठे किए थे नमूने
आपको बता दें कि यूनिवर्सिटी ऑफ मेन के 6 वैज्ञानिकों सहित पर्वतारोहियों का एक दल साल 2019 में ग्लेशियर के ऊपर पहुंची, जहां से टीम ने 10 मीटर लंबे बर्फ के टुकड़े से सैंपल्स इकट्ठा किए थे। वहीं संयुक्त राष्ट्र के जलवायु वैज्ञानिकों के अनुसार दुनिया भर में लाखों लोग पहले से ही जलवायु परिवर्तन के पानी से संबंधित प्रभावों का अनुभव कर रहे हैं।



















