जगदलपुर। आमट, मंडिया पेज, जोन्दरा पेज, चापा लाड़ू जैसे बस्तरिया व्यंजनों का स्वाद चखने के बाद राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने जमकर प्रशंसा की। आसना में वन विभाग के पार्क में यहां की विभिन्न जनजातियों की जीवन शैली को प्रदर्शित करने के लिए बनाए गए बस्तर जनजातीय जीवन चित्रण का अवलोकन करने पहुंची राज्यपाल सुश्री उइके जब धुरवा पारा पहुंची तब इनका स्वागत बस्तरिया परम्परा के अनुसार किया गया। इसके बाद इन्हें कई प्रकार के बस्तरिया व्यंजन परोसे गए, जिनमें आमट, मंडिया पेज, चापा लाड़ू महुआ लाड़ू, केऊ कन्द, तिखुर, उड़द बड़ा, कुल्थी पपीते की सब्जी आदि का स्वाद लिया। इन सभी व्यंजनों के स्वाद की जमकर प्रशंसा करने के साथ ही उबले गए कुल्थी को चखने के बाद उन्होंने इसको बनाने की विधि भी पूछी। इस दौरान उन्होंने जब यहां बनी ढेकी को देखा तो स्वयं भी उसे चलाकर देखा। सुश्री उइके ने बस्तरिया व्यंजनों को तैयार करने वाली महिलाओं को राजभवन भी आमंत्रित किया।
सुश्री उइके ने यहाँ बसने वाली विभिन्न जनजातीय समुदायों की जीवन शैली को प्रदर्शित करने के बनाये गए इस परिकल्पना की सराहना की। इस अवसर पर कलेक्टर श्री रजत बंसल ने बताया कि यहां की जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए बादल एकेडमी की स्थापना भी की गई है। वहीं जनजातीय जीवन शैली को प्रदर्शित करने के लिये इस परिसर को पुनः विकसित किया गया है। इसके तहत माड़िया, मुरिया, कोया, मुंडा, हल्बा, भतरा, धुरवा, दोरला जनजातीय जीवनशैली को प्रदर्शित किया जा रहा है। इनमें उनके निवास के साथ ही खेती बाड़ी आदि गतिविधियों का प्रदर्शन भी किया जा रहा है।

राज्यपाल ने की बस्तरिया महिलाओं की प्रशंसा

यहां विहान के माध्यम से स्व सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं से चर्चा करते हुए उन्होंने आर्थिक गतिविधियों की जानकारी ली। यहां वन धन समितियों के माध्यम से कोदो-कुटकी, रागी जैसी लघु धान्य फसलों की खरीदी का कार्य करने वाली महिलाओं से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इन फसलों की गुणों के कारण अब शहरों में लगातार मांग बढ़ रही है, जिससे यह फसल आर्थिक रूप से भी लाभकारी हो रही है। उन्होंने कहा कि ढेकी में कुटे हुए अनाज की मांग भी बढ़ रही है। उन्होंने वन धन योजना के तहत किये जा रहे कार्यों के सम्बंध में भी विस्तार से जानकारी ली। इस दौरान कलेक्टर श्री बंसल ने बताया कि यहां बहुतायत में अच्छी गुणवत्ता की इमली मिलती है। वन धन योजना के तहत इसे न्यूनतम समर्थन मूल्य में क्रय किया जा रहा है। इससे इमली संग्राहकों को बाजार के अन्य व्यापारी भी अच्छा मूल्य देकर इमली खरीद रहे हैं। मुख्य वन संरक्षक श्री मोहम्मद शाहिद ने बताया कि वनोपजों की खरीदी के लिए स्व सहायता समूहों को अग्रिम राशि प्रदान की जाती है। वहीं इन उत्पादों की बिक्री के लिए भी वनोपज संघ द्वारा जिम्मेदारी ली जाती है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष जिले में 37 हजार क्विंटल इमली के बीज निकालने का कार्य किया गया। इसके साथ ही बस्तर में काजू प्रसंस्करण का कार्य भी किया जा रहा है। काजू प्रसंस्करण के कार्य से लगभग 300 महिलाएं जुड़ी हुई हैं, जिन्होंने लगभग 3 करोड़ रुपए के काजू का प्रसंस्करण किया। इससे महिलाओं को लगभग 75 लाख रुपए की आय अर्जित हुई। इस दौरान कलेक्टर श्री बंसल ने बस्तर में कॉफी की खेती के विस्तार के लिए किए जा रहे प्रयासों के सम्बंध में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बहुत ही जल्द दिल्ली में भी बस्तर कॉफी का आउटलेट खोल जाएगा।
बस्तर जिले में विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से समृद्धि की राह पर आगे बढ़ रही महिलाओं को उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए सुश्री उइके ने कहा कि महिलाओं की इस भागीदारी से बस्तर निश्चित तौर पर अब दुगुनी गति से विकास की राह पर आगे बढ़ने को तैयार है। उन्होंने कहा कि यहां की महिलाओं ने अपने कार्य के प्रति लगन और परिश्रम से कई पुरस्कार भी प्राप्त किए हैं, जिनके लिए वे बधाई की पात्र हैं।
इस दौरान कमिश्नर श्री श्याम धावड़े, पुलिस महानिरीक्षक श्री सुंदरराज पी, सीसीएफ मोहम्मद शाहिद, कलेक्टर रजत बंसल,वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री जितेंद्र मीणा, वन मण्डलाधिकारी श्री डी पी साहू सहित अधिकारी कर्मचारी तथा स्व सहायता समूहों के सदस्य उपस्थित थे।

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