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रायपुर। राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके आज अपने छिंदवाड़ा प्रवास के दौरान परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी के जन्म दिवस के अवसर पर सहज योग समिति द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुई। उल्लेखनीय है कि प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी छिंदवाड़ा के सालीमेटा स्थित निर्मल आश्रम में परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी का जन्मोत्सव उनके अनुयायियों व सहजयोगियों द्वारा श्रद्धापूर्वक मनाया गया।
राज्यपाल सुश्री अनुसईया उइके ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि निर्मल आश्रम शिव पर्वत में आज परमपूज्य श्रीमाताजी निर्मला देवीजी के जन्मदिवस के अवसर पर शामिल होना मुझे आनंदित कर रहा है। छिंदवाड़ावासियों के लिए भी यह गर्व की बात है कि श्रीमतीजी जैसे पुण्यात्मा का जन्म इस धरा पर हुआ। निर्मल आश्रम में आते ही मन को शांति मिलती है और आध्यत्म से जुड़कर आलौकिक आनंद का अनुभव होता है। सरल सहज व्यक्तित्व की धनी श्रीमाता जी को उनके जन्मदिवस के अवसर पर राज्यपाल सुश्री उइके ने नमन करते हुए कहा कि श्रीमाता जी का पूरा जीवन अनुकरणीय है तथा उनके द्वारा उद्घृत विचार आज भी प्रासंगिक हैं। बचपन से श्रीमाता जी अत्यंत करूणामयी और सहृदया थीं। उनका मानना था ‘बिना आत्म साक्षात्कार दिए विश्व में परिवर्तन संभव नहीं है। राज्यपाल सुश्री उइके ने कहा कि श्रीमाता जी के वात्सल्य की सीमाएं नहीं थी। मानव प्रेम के साथ-साथ पशु-पक्षियों से भी उनकी अगाध मित्रता थी। युवावस्था में श्रीमाताजी ने सक्रिय रूप से स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में भाग लेकर देश को आजादी दिलाने में अपना योगदान दिया। उनका मानना था कि अपने अंदर स्थित परमात्मा की शक्ति को जागृत कर शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक उन्नति को प्राप्त किया जा सकता है।
राज्यपाल सुश्री उइके ने कहा कि श्रीमाता जी ने सहज योग के माध्यम से आत्म साक्षात्कार का अनुभव किया और सहज योग का सृजन आज भी मानव कल्याण के लिए लोगों का मार्गदर्शन कर रही है। श्रीमाताजी के विचारों के अनुसार अपने सभी सांसारिक कर्तव्यों का पालन करते हुए व्यक्ति सपरिवार सहज योग ध्यान धारण कर सकता है। सहज योग ध्यान-धारणा के लिए कोई भी शारीरिक व्यायाम करने की आवश्यकता नहीं होती। सहजयोग में सभी धर्मों के सारतत्व का समावेश है। कुण्डलिनी जागरण एवं आत्म-साक्षात्कार की पूरी प्रक्रिया पूर्णतः निःशुल्क है। आत्म साक्षात्कार के आनन्द में प्रस्थापित हो जाने पर व्यक्ति अन्य लोगों की भी जागृति कर सकता है। इससे समस्याओं के समाधान मिलते हैं। पारस्परिक संबंध सुधरते हैं। स्वास्थ्य बेहतर हो जाता है व शारीरिक विकार दूर हो जाते हैं। चित्त की एकाग्रता से स्मरण शक्ति का विकास होता है। आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
राज्यपाल सुश्री उइके ने संबोधन के अंत में कहा कि श्रीमाताजी के सिद्धांत व विचार अनंत है, उसे शब्दों में नहीं बांधा जा सकता है। साथ ही उनके अनुयायियों और सजयोगियों से आग्रह किया कि श्रीमाताजी के सद्विचारों और सहजयोग को देश-विदेश में विस्तार दें ताकि इसका लाभ अधिक से अधिक लोगों को मिल सके।
इस अवसर पर सहज योग ट्रस्ट समिति के श्री रमेश मंथाना, पूर्व प्रशासनिक अधिकारी श्री दिनेश राय सहित देश-विदेश से आए हजारों सहयोगी उपस्थित थे

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