दोनों राज्यो के पेंशनरों के हित में शीध्र निर्णय ले छ ग शासन

छत्तीसगढ़ राज्य संयुक्त पेंशनर्स फेडरेशन के अध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने आरोप लगाया है कि छत्तीसगढ़ सरकार को पेंशनरों को केन्द्र के बराबर डी आर देने के मामले पर मध्यप्रदेश शासन वित्त विभाग के प्रमुख सचिव के द्वारा 23 मार्च को प्रेषित प्रस्ताव जिसमें पेंशनरों को 14% महँगाई राहत (डी आर) देने हेतु सहमति मांगा है,उसे छत्तीसगढ़ सरकार ने 20 दिन का समय बीत जाने के बाद भी लटका कर रखा है। जिसके कारण दोनों ही राज्य के पेंशनर्स को इस भीषण महँगाई के दौर में आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है परन्तु छत्तीसगढ़ शासन को इसकी कोई चिंता नहीं है वह कुम्भकर्णी नींद में है।
उल्लेखनीय हैं कि मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 49(6) में दिए गए संवैधानिक बाध्यता के कारण दोनों राज्य के बीच पेंशनरों को आर्थिक लाभ देने में 74:26 के दर से बजट का भार दोनों राज्य वहन करते हैं इसलिए आपसी सहमति की अनिवार्यता लगभग 21 वर्षो से कायम है जिसे दोनों ही राज्य के पेन्शनर और पेन्शनर परिवार भुगतने को मजबूर है।
जारी विज्ञप्ति में छत्तीसगढ़ राज्य सँयुक्त पेन्शनर फेडरेशन के अध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव तथा फेडरेशन से जुड़े पेन्शनर कल्याण संघ के डॉ डी पी मनहर, पेन्शनर एसोसिएशन के गंगाप्रसाद साहू, प्रगतिशील पेंशनर्स कल्याण संघ के आर पी शर्मा एवं पेंशनर महासंघ छत्तीसगढ़ प्रदेश के जयप्रकाश मिश्रा आदि ने केंद्र सरकार द्वारा जनवरी 22 से 3% की अतिरिक्त किस्त घोषित करने के बाद अब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से आग्रह किया है मध्यप्रदेश के प्रस्ताव पर सहमति देकर तुरन्त केन्द्र के देय तिथि से एरियर सहित बकाया 17% प्रतिशत महंगाई भत्ता-राहत की किस्तें कर्मचारियों एवं पेंशनरों देने के आदेश प्रसारित कराए।

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