मानसिक बीमारी मे वे विकार आते है, जो व्यक्ति की मनोदशा, सोच और व्यवहार को करते हैं प्रभावित
नारायणपुर.
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर (छ.ग.) के अंतर्गत कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र, नारायणपुर की राष्ट्रीय ,सेवा योजना इकाई एवम राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कर्यक्रम, जिला अस्पताल नारायणपुर के संयुक्त तत्वाधान मे मानसिक स्वास्थ्य और लाइफ स्किल पर वर्कशॉप का आयोजन किया गया। अधिष्ठता एवम राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यक्रम अधिकारी डॉ. रत्ना नशीने ने बताया की व्यक्ति के शरीर में मस्तिष्क का महत्त्वपूर्ण स्थान है, क्योंकि व्यक्ति जो भी कार्य करता है वह अपने मस्तिष्क के संकेत पर या मन के अनुसार करता है। जब तक हमारा मन स्वस्थ नहीं रहता है, तब तक हम किसी भी कार्य को ठीक से नहीं कर सकते। जिन लोगों का मस्तिष्क स्वस्थ नहीं रहता वे जीवन की विभिन्न परिस्थितियों का सामना सफलतापूर्वक नहीं कर पाते, वे सदा एक प्रकार से मानसिक उलझन या परेशानी में रहते हैं। इसका कारण मानसिक दुर्बलता या किसी प्रकार का विकार होता है। एक ऐसी स्थिति जो व्यक्ति की महसूस करने और सोचने और कार्य करने की क्षमता को प्रभावित करती है मानसिक रोग कहलाती है। मानसिक बीमारी मानसिक स्वास्थ्य की अनेक स्थितियों को प्रभावित करती है। मानसिक बीमारी मे वे विकार आते है जो व्यक्ति की मनोदशा, सोच और व्यवहार को प्रभावित करते हैं। मानसिक बीमारी के उदाहरणों में डिप्रेशन चिंता विकार, सिजोफ्रेनिया (एक प्रकार का पागलपन), भोजन में अव्यवस्था और नशे की लत आदि विकार शामिल हैं। उदासी की भावना अत्यधिक थकान, कमजोरी महसूस होना या नींद की समस्याएं उत्पन्न होना सोचने ओर समझने में उलझन महसूस होना या एकाग्रता में कमी आना दोस्तों और गतिविधियों से अलग हो जाना दोस्तों और परिवार के साथ लगातार लड़ना-झगड़े या बहस करना, अत्यधिक क्रोध, शत्रुता या हिंसा को भावनाएं उत्पन्न होना, खाने की आदतों में मुख्य रूप से परिवर्तन आना,कभी-कभी मानसिक रोग के लक्षण अन्य शारीरिक समस्याओं के रूप में प्रगट हो सकते है, जैसे पेट दर्द, पीठ दर्द, सिरदर्द, या अन्य अस्पष्ट दर्द और पीड़ा।
क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. प्रीति चांडक, जिला अस्पताल नारायणपुर ने मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा करते हुए विभिन्न मानसिक बीमारियों लक्षणों एवं उपचार के बारे में विस्तृत जानकारी दी। व्यक्तित्व विकास पर चर्चा करते हुए व्यक्तित्व पर मानसिक स्वास्थ्य का सकारात्मक प्रभाव विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का पालन करते हुए निरंतर परिश्रम अभ्यास करने की बात कही। साथ ही लाइफ स्किल ट्रेनिंग में जीवन में आने वाली समस्याओं को हल करने अलग-अलग प्रकार के लाइफ स्किल प्रॉब्लम सॉल्विंग ,डिसीजन मेकिंग , क्रिटिकल थिंकिंग क्रिएटिव थिंकिंग एंपैथी और इफेक्टिव कम्युनिकेश स्किल को एक्टिविटी के माध्यम से बताया। कार्यक्रम मे इस अवसर 68 स्वयं सेवको ने वर्क्शाप में भाग लिया । अध्यापकगण मे निधि शर्मा , विक्रम चंद्रवशी , श्री हिमालय साहू, डॉ. अनिमेष चंद्रवशी , श्री किशोर मण्डल, श्री सुनील सोनवानी उपस्थित रहे निधि शर्मा ने कार्यक्रम का संचालन किया आभार व्यक्त हिमालय साहू ने किया। स्वयं सेवको मे घनश्याम साहू, वीरेंद्र कुमार, नरोत्तम पटेल, योगिता साहू, कीर्ति यादव आदि ने अपने विचारों की अभिव्यक्ति रंगोली के माध्यम से किया ।



















