राजधानी रायपुर और बाहरी क्षेत्र में करोड़ों की बेशकीमती सरकारी और खाली पड़़ी जमीन पर भू-माफियाओं की गिद्ध दृष्टि गड़ी हैं। नगर निगम, जिला प्रशासन के लिए यह सिरदर्द साबित होने लगा है। जिस जमीन पर कब्जा करना होता है, उसे घेरने में जरा भी देर नहीं करते। बस चिंता रहती है क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को साधने की। निगम क्षेत्र के अलावा आसपास के गांवों में भी भू-माफियाओं ने पकड़ बना ली है।
खेती की जमीन पर मुरुम डालकर बिना डायवर्सन कराए अवैध प्लाटिंग धड़ल्ले से की जा रही है। राजधानी रायपुर के कोटा, सेजबहार, डूंडा, काठाडीह, भाटागांव, सेमरिया, उमरिया, नवा रायपुर से लगे गांवों में अवैध प्लाटिंग हो रही है। एक भू-माफिया ने समाज सेवा की आड़ में कोटा, फाफाडीह में बेशकीमती सरकारी जमीन को घेर दिया है। इसकी जानकारी जब जनप्रतिनिधियों को लगी तो वे अपना हिस्सा मांग बैठे। भू-माफिया ने फायदे को ध्यान में रखकर मोटी रकम भेंट कर विरोध को दबा दिया। कुछ सप्ताह पहले राजधानी में अवैध प्लाटिंग करने वालों पर प्रशासन की तरफ से कड़ी कार्रवाई की गई। लोगों से मिली शिकायत के आधार पर राजस्व विभाग व नगर निवेश विभाग ने दो एकड़ कृषि भूमि पर अवैध कब्जा हटाया। साथ ही सीसी रोड को काटकर खसरे को ब्लाक किया। अधिकारियों ने बताया कि कृषि भूमि पर अवैध प्लाट काटकर सीसी रोड के साथ आफिस भी बनाया गया था, राजधानी रायपुर के आसपास व आउटर इलाके में अवैध प्लाटिंग का खेल लंबे समय से जारी है। गाइडलाइन से ज्यादा कीमत पर जमीन बेची जा रही है। कृषि जमीन को परिवर्तन किए बिना ही भू-माफिया बेच रहे हैं।
राजधानी रायपुर और आसपास के इलाकों में करोड़ों की बेशकीमती जमीन को सस्ते में खरीदकर सूबे के एक नेताजी इन दिनों केंद्रीय जांच एजेंसी के निशाने पर आ गए हैं। नेताजी ने दूसरों की जमीन तो खरीदी ही, अपने रिश्तेदारों तक को नहीं छोड़ा। उसमें भी बड़ा गड़बड़झाला है। राजधानी में अवैध प्लाटिंग करने वालों पर प्रशासन की तरफ से कड़ी कार्रवाई शुरू हो गई है। लोगों से मिली शिकायत के आधार पर राजस्व विभाग व नगर निवेश विभाग ने दो एकड़ कृषि भूमि पर अवैध कब्जा हटाया। साथ ही सीसी रोड को काटकर खसरे को ब्लाक किया। अधिकारियों ने बताया कि कृषि भूमि पर अवैध प्लाट काटकर सीसी रोड के साथ आफिस भी बनाया गया था।



















