हिंदू धर्म में कोई भी शुभ कार्य में स्वास्तिक का चिन्ह जरूर बनाया जाता है। स्वास्तिक शब्द सु, अस, क से मिलकर बना है। जिसमें ‘सु’ का अर्थ ‘शुभ’, ‘अस’ का अर्थ ‘अस्तित्व’ और ‘क’ का अर्थ ‘कर्ता’ होता है। किसी भी शुभ कार्य में स्वास्तिक बनाने की परंपरा हिंदू धर्म में सदियों से चली आ रही हैं। मान्यता है कि स्वास्तिक बनाते समय चार भुजाएं समानांतर रहती है और इन चारों भुजाओं का बड़ा धार्मिक महत्व है और यह चारों भुजाएं चारों दिशाओं का प्रतीक माना जाता है। आइए जानते हैं स्वास्तिक के महत्व के बारे में..
प्रवेश द्वार पर बनाएं स्वास्तिक
हिंदू धर्म में ज्यादातर लोगों के घरों के प्रवेश द्वार में स्वास्तिक बना हुआ देखा होगा। ज्योतिषशास्त्र के मुताबिक प्रवेश द्वार पर स्वास्तिक का चिन्ह बेहद शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि प्रवेश द्वार पर स्वास्तिक बनाने से कोई भी बुरी नजर व दोष घर के सदस्यों को प्रभावित नहीं कर सकती हैं। घर के प्रवेश द्वार पर स्वास्तिक बनाने से उस घर में कभी भी दुख व दरिद्र नहीं आता है। घर के प्रवेश द्वार पर हल्दी से बना स्वास्तिक बनाना शुभ होता है। इसे ईशान या उत्तर दिशा में दीवार पर बनाएं।
घर के मंदिर में बनाएं स्वस्तिक
घर के मंदिर में स्वास्तिक का चिह्न बनाएं। इसके अलावा जिस स्थान पर देवी देवताओं की मूर्ती रख रहे हैं वहां स्वास्तिक बनाकर उसके ऊपर देवताओं का मूर्ति स्थापित करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है। जहां पर आप अपने घर में ईष्टदेव की पूजा आराधना करते हैं उस स्थान पर भगवान के आसन के ऊपर स्वस्तिक का चिह्न बनाना बहुत ही शुभ रहता है।
घर की तिजोरी में बनाएं स्वास्तिक
घर की तिजोरी में स्वास्तिक का चिह्न बनाने से समृद्धि बनी रहती है। कहते है तिजोरी में स्वास्तिक बनाने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। इसके साथ ही व्यक्ति को कभी भी धन की हानि नहीं होती है।

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