आवर्ती चराई विकास से जिले का बदल रहा स्वरुप

पशुपालकों और महिलाओं को मिल रहा सीधा लाभ

दंतेवाड़ा.

 और महिलाओं को मिल रहा सीधा लाभ

प्रदेश सरकार की महत्वकांक्षी योजनाओ में से एक है आवर्ती चराई योजना। आवर्ती चराई विकास से पशुपालकों और महिलाओं को सीधा लाभ मिल रहा है। आवर्ती चराई योजना के अंतर्गत पशुओं के लिए पीने का पानी ,खाने के लिए चारे की व्यवस्था उपलब्ध कराना एवं आवर्तीचराई  क्षेत्र के स्थानीय लोगों को आय मूलक गतिविधि (जैसे गोबर खरीदी, कुक्कुट पालन, सुअर पालन, साग-सब्जी उत्पादन, बकरी पालन आदि) के माध्यम से उनके जीविकोपार्जन को सुदृढ़ एवं उनके आय में वृद्धि करना इस योजना का मुख्य उद्देश्य है। दंतेवाड़ा वन मंडल अंतर्गत स्वीकृत आवर्ती चराई केन्द्रों में मवेशियों के लिए आराम करने एवं ठहरने के लिए अस्थाई शेड एवं चबूतरा का निर्माण किया गया। पशुओं के चारे संग्रहण के लिए अस्थाई शेड निर्माण किया गया एवं गौठान मितान (चरवाहा) के आराम करने हेतु भी अस्थाई शेड का निर्माण किया गया है। जिले में 30 आवर्ती चराई केन्द्र जिसमें दंतेवाड़ा में 9 केंद्र, बचेली में 10 केन्द्र, गीदम में 6 केन्द्रों में गोबर का संग्रहण कर नाडेप बैग में वर्मी कम्पोस्ट तैयार किया जा रहा है। जिसमें वर्मी कम्पोस्ट तैयार करने हेतु गोबर का 1192694 किलोग्राम खरीदी की गई है। आवर्ती चराई केन्द्र कुम्हाररास एवं गीदम परिक्षेत्र अंतर्गत बड़े तुमनार में मल्टीएक्टिविटी सेंटर की स्थापना की गई है जिसमें संलग्न स्व-सहायता समूह के द्वारा गोबर से वर्मी कम्पोस्ट खाद निर्माण एवं साग सब्जी उत्पादन किया जा रहा है जिससे स्व-सहायता समूह की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए सार्थक प्रयास किया जा रहा है।

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