बारिश का मौसम शबाब पर है। आसमान में काली घटाएं परवाज कर रहीं हैं। बारिश की बूंदे प्रकृति को नहला रहीं हैं। पेड़ पौधों में हरियाली मुस्कुरा रही है। किंतु बारिश के इस मनभावन मौसम में जुगनू की चमक और तितली की शरारत देखने को कम मिल रही है।

दरअसल, प्रदूषित पर्यावरण और कीटनाशक दवाओं के अंधाधुंध प्रयोग ने इन सुंदर निरीह जीवों को लुप्तप्राय बना दिया है। अब न झुरमुटों में जुगनू की चमक दिखाई देती है और न फूल पत्तियों पर रंग बिरंगी तितलियां डोलतीं हैं।

विश्व पर्यावरण संरक्षण विभाग के एक सर्वे के अनुसार कीटनाशक दवाओं और पर्यावरण प्रदूषण के कारण जुगनू, तितली के अलावे अन्य छोटे जीव-जंतु तेजी से लुप्त हो रहे हैं। इनकी संख्या में तेजी से गिरावट दर्ज की जा रही है। शीघ्र हीं इसके संरक्षण और संवर्धन के उपाय नहीं किए गए तो इनकी कई प्रजातियां हमेशा के लिए हमारी आंखों से ओझल हो जाएंगी।

बच्चों के प्रिय हैं जुगनू और तितली – जुगनू और तितली प्रकृति की अनमोल देन है। यह प्रकृति को सुंदरता प्रदान करते हैं । बच्चे इन्हे बेहद पसंद करते हैं। जुगनुओं की चमक और तितलियों की उड़ान उन्हें खूब भाता है। तितलियों के पीछे भागना और जुगनुओं को निहारना उन्हें बेहद पसंद है।

जुगनू पृथ्वी पर उतरे तारों की तरह दिखाई देते हैं। कई दफे तो इन्हें आपने पकड़ने की कोशिश भी की होगी। यूं तो ये शहरों में कम ही दिखाई देते हैं, पर गांवों में ये अभी भी देखे जा सकते हैं। लेकिन कुछ वर्षो से इनकी आबादी घटती जा रही है। ऐसा इसलिए है क्योंकि जुगनू गायब हो रहे हैं। भारत में जुगनू की लगभग 7-8 प्रजातियां ही बची हैं; अमेरिका (America) स्थित एक पत्रिका स्मिथसोनियन (Smithsonian) के अनुसार दुनिया भर में 2,000 से अधिक प्रजातियां हैं। यह दर्शाने वाले कोई आंकड़े मौजूद नहीं हैं, जिनसे यह पता चले कि जुगनू विलुप्त होने के कगार पर खड़े हैं या नहीं। विशेषज्ञों का कहना है कि जुगनू की आबादी को प्रभावित करने वाले दो प्रमुख कारक – कीटनाशकों का उपयोग और बढ़ता प्रकाश प्रदूषण हैं। यदि उन्हें नियंत्रित नहीं किया गया, तो अंततः जुगनू विलुप्त हो जाएंगे, जिससे हमारी गर्मी की रातें कम जादुई हो जाएंगी।

इनकी जान को भी है खतरा – कीटनाशक दवाओं के अंधाधुंध प्रयोग तितली और जुगनू के अलावे मेढ़क, झींगुर, दादुर, चमगादड़, आदि का अस्तित्व भी खतरे में है। इनकी प्रजातियों की संख्या में भी तेजी से गिरावट दर्ज की जा रही है। उक्त सभी किसानों के मित्र जीव हैं। ये हानिकारक कीटाणुओं को आहार बनाकर फसलों की रक्षा करते हैं। इनका विनाश मानव जाति के लिए दुर्भाग्य पूर्ण होगा।

कीटनाशक दवाओं और रासायनिक खाद के प्रयोग से कई जीव-जंतु नष्ट हो रहे हैं। सेहत पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ रहा है। किसानों को जैविक खाद और हर्बल कीटनाशक उपयोग करना चाहिए।

क्या है जुगनू – जुगनू या खद्योत कीटों का एक परिवार है। इनके पंख होते हैं। ये जीवदीप्ति उत्पन्न करके अपने संगी को आकृष्ट करते हैं या दूसरे जानवरों का शिकार करने के लिए इसका उपयोग करते हैं। इनके द्वारा उत्पन्न प्रकाश पीला, हरा, लाल आदि हो सकते हैं। यह प्रकाश रासायनिक क्रिया द्वारा उत्पन्न किया जाता है। इसमें अवरक्त और पराबैंगनी आवृत्तियां नहीं होतीं।

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