महान देशभक्तों के समर्पण और बलिदान तथा महापुरुषों के योगदान को किया स्मरण
मुख्यमंत्री का जनता के नाम स्वतंत्रता दिवस संदेश का कलेक्टर ने किया वाचन
मुख्य अतिथि के हाथों उत्कृष्ट सेवाओं के लिए पुलिस के जवान और अधिकारी-कर्मचारी हुए हुए सम्मानित

मुख्य अतिथि के हाथों उत्कृष्ट सेवाओं के लिए पुलिस के जवान और अधिकारी-कर्मचारी हुए हुए सम्मानित

छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. चरण दास महंत ने आज गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के गुरूकुल खेल मैदान गौरेला में आयोजित स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में रिमझिम फूहारों के खुशनुमा महौल में शान से तिरंगा फहराया। उन्होने कलेक्टर सुश्री ऋचा प्रकाश चौधरी और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अर्चना झा के साथ खुली जीप में परेड का निरीक्षण किया। डॉ. महंत ने जिले वासियों को स्वतंत्रता दिवस की बधाई और शुभकामनाएं देते हुए उन्हे सम्बोधित किया। उन्होने कहा कि अपने अतीत का सम्मान करना, वर्तमान का दायित्व होता है और हमारी यह कोशिश भी होनी चाहिए कि हम अपने अतीत से प्रेरणा लें क्योंकि यह शाश्वत सत्य है कि अतीत के गर्भ से ही वर्तमान का जन्म होता है। हमें यह सदैव स्मरण रखना चाहिए कि आज हम अपने भारत को बेहतर उन्नत देख पा रहे हैं, यह सब महान देश भक्तों के समर्पण और बलिदान से ही संभव हो सका है। अपने देश के महापुरुषों के योगदान को यदि हम हमेशा स्मरण रखते हैं तो मैं समझता हूँ यह देश की सच्ची सेवा होगी।
            डॉ. महंत ने नवगठित गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले की पावन मिट्टी को सादर नमन करते हुए कहा कि प्राकृतिक धन धान्य से परिपूर्ण यह जिला जीवनदायिनी अरपा नदी का उद्गम क्षेत्र है। इस जिले को माँ नर्मदा के सामीप्य का भी सौभाग्य प्राप्त है। आदिवासी बाहुल्य हमारा यह नवगठित जिला अनादि काल से वर्तमान काल तक अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाये हुए है। हमारा यह क्षेत्र वह पावन क्षेत्र है, जहां पूज्य कबीर साहेब जी का पदार्पण हुआ था। उनके आगमन को चिरस्मरणीय बनाने के उद्देश्य से ही कबीर चबूतरा का निर्माण हुआ। हमारे इस क्षेत्र में संत गुरु नानक देव जी के प्रवास का भी प्रमाण विद्यमान है। स्वतंत्रता पूर्व महान कवि, लेखक, चित्रकार पूज्य गुरूदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर जी ने भी अपनी धर्मपत्नी के उपचार हेतु पेंड्रा-गौरेला के बीच टी.बी. सेनेटोरियम हॉस्पिटल में कुछ समय व्यतीत किया था। आज जब हम अपने देश की आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं, तो हमारा यह कर्तव्य होता है कि हम अपने पूर्वजों का पावन स्मरण करें। यह उल्लेखनीय है कि देश की आजादी के लिए इस क्षेत्र ने अनेक ऐसे देशभक्त दिये हैं, जिन पर हमें गर्व है।
       डॉ. महंत ने कहा कि देश की आजादी के 75वें वर्ष पूर्ण हुए हैं तो आज प्रत्येक भारतीय का यह कर्तव्य है कि वह इस बात पर अवश्य विचार करें, मनन करें कि विगत सात दशकों से अधिक की स्वतंत्र भारत की यात्रा में हमने क्या खोया, क्या पाया, क्या हम उन मूल्यों, सिद्धांतों और आदर्शों को सुरक्षित रख सके हैं, जिन मूल्यों, सिद्धांतों और आदर्शों के बलबूते पर हमने देश की आजादी हासिल की थी। आजादी की वर्षगांठ का यह हीरक जयंती वर्ष वस्तुतः हमारे लिए आत्म अवलोकन का एक अवसर ही है। मैं यह मानता हूँ व्यक्ति समाज और देश को आत्म अवलोकन अवश्य करना चाहिए, क्योंकि आत्म अवलोकन से ही हम वर्तमान के संकट और भविष्य की चुनौतियों पर विजय पा सकते हैं। उन्होने कहा कि आजादी की वर्षगांठ के 75वें वर्ष के ऐतिहासिक अवसर पर देश की आजादी के संघर्ष को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य के साथ-साथ क्षेत्रीय परिप्रेक्ष्य में भी जानना आवश्यक मानता हूँ। आज के इस ऐतिहासिक अवसर पर मैं संक्षेप में कुछ बातें भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ क्षेत्र की भूमिका और उसके योगदान की भी रखना चाहूंगा। आजादी की लम्बी लड़ाई में राष्ट्रीय आन्दोलन की चेतना से छत्तीसगढ़ को जोड़ने वाले अनेक क्रांतिवीर और मनीषीयों के योगदान से इस माटी का सम्मान बढ़ा है।
            डॉ. महंत ने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन में छत्तीसगढ़ का गौरवशाली इतिहास है। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर 15 अगस्त 1947 देश की आजादी प्राप्त होने तक छत्तीसगढ़ के वीर सपूतों ने जो बलिदान दिया है, वह हम सबके लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है। वर्ष 1818 में अबूझमाड़ इलाके में गैंदसिंह जी के नेतृत्व में आदिवासियों ने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का पहला बिगुल फूंका था। 1857 में शहीद वीर नारायण सिंह ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष कर अपने प्राणों का बलिदान दिया। 10 दिसम्बर 1857 को रायपुर के जयस्तंभ चौक में अंग्रेजों ने उन्हें फांसी दी थी। 1910 में बस्तर का भूमकाल आन्दोलन वह आन्दोलन था, जिसने अंग्रेजी शासन की नींव को हिला दिया था। यह आन्दोलन छत्तीसगढ के आदिवासियों का सबसे बड़ा सशस्त्र आन्दोलन था। आदिवासी सेना के सेनापति गुण्डाधूर के नेतृत्व में यह लड़ाई लड़ी गयी। सत्याग्रह आन्दोलन में सक्रियता राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जी का छत्तीसगढ़ प्रवास एक ऐतिहासिक अवसर रहा। यह उल्लेखनीय है कि वर्तमान धमतरी जिले के छोटे से गांव कंडेल के किसानों ने अंग्रेजी शासन के तुगलकी फरमान के विरूद्ध जल सत्याग्रह किया था। इस सत्याग्रह से अभिभूत होकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी 21 दिसम्बर 1920 को धमतरी पधारे थे। 1933 में पूज्य बापू का दुबारा रायपुर आगमन हुआ। बापू की इन छत्तीसगढ़ की यात्राओं से छत्तीसगढ़ में चल रहे स्वतंत्रता आन्दोलन को गति मिली। 1942 के असहयोग आन्दोलन को हमारे छत्तीसगढ़ क्षेत्र की सक्रिय सहभागिता रही भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ से बच्चें, युवा, बुजुर्ग, व्यापारी, किसान सभी ने मिलकर संघर्ष किया।

       स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में मुख्यमंत्री श्री भूपेष बघेल का जनता के नाम संदेश का वाचन कलेक्टर सुश्री ऋचा प्रकाश चौधरी ने किया। इस अवसर पर शांति और सद्भावना के प्रतीक के रूप में रंग बिरंगे गुब्बारे खुले आसमान में छोड़े गए। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर परेड में पुलिस, वन, राष्ट्रीय कैडेट कोर, स्काउट और गाइड के पलटन ने परेड मार्च कर मुख्य अतिथि को सलामी दी। परेड ने आकर्षक मार्च पास्ट से मुख्य अतिथि और नागरिकों का मन मोहा। मुख्य अतिथि ने उत्कृष्ट सेवाओं के लिए पुलिस के जवानों और अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर कोरबा सांसद श्रीमती ज्योत्सना चरणदास महंत, मरवाही विधायक डॉ केके ध्रुव, अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य श्रीमती अर्चना पोर्ते सहित जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, वनमंडलाधिकारी श्री दिनेश पटेल, अपर कलेक्टर श्री बीसी एक्का, परियोजना निदेशक श्री आरे के खूंटे, संयुक्त कलेक्टर श्री वीरेंद्र सिंह, अनुविभागीय दण्डाधिकारी श्री पुष्पेंद्र शर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी कर्मचारी, पत्रकारगण, स्कूली छात्र-छात्राएं और जिलेवासी उपस्थित थे।

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