What's Hot

बच्चों की सुरक्षा और भलाई का मुद्दा हमेशा पैरेंट्स के लिए प्राथमिकता होता है। इसके लिए बकायदा हर चीज को पूरी तरह परख कर ही कदम आगे बढ़ाया जाता है। लेकिन असुरक्षा और हानि होने के डर से बच्चों को हमेशा के लिए घर में बंद करके तो रखा नहीं जा सकता। बच्चों के सम्पूर्ण विकास के लिए उन्हें समय समय पर बाहरी दुनिया से रूबरू होने का अवसर देना भी जरूरी है। ऐसे में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं स्कूल। यहाँ बच्चे न केवल ज्ञान पाते हैं बल्कि अपने हमउम्रों से साथ दुनिया को सीखने और समझने की ओर भी आगे बढ़ते हैं। यही वह अनुभव है जो बच्चों को बड़ा होने पर आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार करता है। बच्चों की स्कूल ट्रिप इस अनुभव यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव होता है। ऐसी ट्रिप के जरिये बच्चे खुद को संभालने, आपातकाल में चीजों का प्रबंधन करने, सामाजिक स्थितियों से सामंजस्य बैठाने और आत्मविश्वास को बढ़ाने जैसी चीजें सीखते हैं। यह लड़कियों के लिए और भी महत्वपूर्ण इसलिए हो जाता है क्योंकि आज भी लड़कों की तुलना में लड़कियों का दुनियावी एक्सपोजर कम होता है। ऐसे में स्कूल ट्रिप उनके लिए सीखने का माध्यम बन सकता है। जानिए कुछ ऐसी सलाहें जो इस तरह की ट्रिप से पहले खासतौर पर बेटियों को देनी चाहिए। ताकि वे ट्रिप से बहुत कुछ सीखें, इसका आनंद लें और सुरक्षित भी रहें।
पूरी जानकारी लें, फिर भेजें
यह सही है कि पहले की तुलना में अब माहौल बहुत बदल गया है। अपने बच्चों की सुरक्षा का मुद्दा अब पहले से ज्यादा परेशान करता है लेकिन केवल इस एक वजह को बच्ची के खुलकर जीने के बीच बाधा न बनने दें। अधिकांश स्कूल लम्बी (2-3 दिन या इससे ज्यादा) की ट्रिप पर छोटे बच्चों को नहीं ले जाते। इसलिए लम्बी ट्रिप पर जाने वाली बच्चियां आमतौर पर 10-15 वर्ष के बीच होती हैं। इस उम्र में उन्हें आप अच्छी तरह हर बात समझा सकते हैं। उन्हें समझाने से पहले ट्रिप से संबंधित पूरी जानकारी स्कूल से लें। कितने टीचर हैं, कितने बच्चे जा रहे हैं, किस जगह जा रहे हैं, सफर कैसे होगा, रुकेंगे कहाँ, आदि। पूरी जानकारी मिलने के बाद एक रफ खाका बनाकर जरूरी सभी फोन नंबरों के साथ बच्ची के साथ रखें, ताकि जरूरत पडऩे पर वह उनका उपयोग कर सके। यदि आपको लगता है कि ट्रिप जिस तरह से प्लान की गई है वह बच्ची की सुरक्षा के लिहाज से ठीक नहीं है तो बेटी को इस बात को शांति से समझाएं कि आप जाने को क्यों मना कर रहे हैं। इसके एवज में अगर आपको अलग से कोई छोटी फैमेली ट्रिप प्लान करना पड़े तो वह भी करें।
ये बातें समझाएं
चाहे बात दो दिनों की हो या हफ्ते भर की, कुछ महत्वपूर्ण सलाहें जो आपकी बेटी को सुरक्षित व स्वस्थ रहने में मदद करेंगी वे इस प्रकार हैं-

  1. हाइजीन का पूरा ख्याल रखने की सलाह। यूं यह बात हर व्यक्ति पर लागू होती है लेकिन घर से बाहर जा रही बेटी के लिए यह और भी महत्वपूर्ण सलाह हो जाती है। खासकर अब कोरोना जैसी महामारी के आने के बाद। उसे समझाएं कि ट्रिप के दौरान वह जहाँ तक हो सके साफ बाथरूम का ही उपयोग करे। साबुन, सेनेटाइजर, हाथ पोंछने के लिए टिशू और वाइप्स हमेशा अपने पास रखे और इनका ही उपयोग करे। पीने के पानी को लेकर भी सावधानी बरते। यदि फील्ड में जाए तो अपनी बॉटल साथ रखे। कई बार बच्चे सामान्य हाइजीन का ध्यान न रख पाने से इंफेक्शन के शिकार हो जाते हैं और ऐसे में ट्रिप का पूरा मजा खराब हो सकता है। यदि बच्ची के पीरियड्स का समय उस दौरान हो तो उसे और खास ख्याल रखने की सलाह दें। सेनेटेरी नैपकिंस और साफ अंडरगार्मेंट्स का प्रयोग सही तरीके से करने की आदत बच्ची में डालें। इससे वह कई तरह के संक्रमणों से बच सकेगी।
    सुरक्षित रहें, सावधानी रखें
  2. सुरक्षा व होशियारी की सलाह। वैसे लड़कियों में छठी इंद्री यूँ भी थोड़ी अधिक सक्रिय होती है लेकिन कई बार मासूमियत और अल्हड़पन में वे अपनी सुरक्षा को लेकर सावधानी नहीं रख पातीं। बेटी को बताएं कि यदि उनके ठहरने का इंतजाम खुले में (टेंट या कैम्पिंग आदि) के रूप में किया गया है तो भी और यदि होटल या किसी हॉस्टल में किया गया है तो भी, अपने रूम के दरवाजों के लॉक और बाथरूम की खिड़कियों आदि को पहले ही पूरी तरह चैक करें। अगर बाथरूम की कोई खिड़की या वेंटिलेशन या दरवाजा ठीक से बंद नहीं है तो तुरंत अपनी टीचर को बताकर उसे ठीक करवाएं।
    कभी अकेले या अंधेरे में खुले में स्थित बाथरूम का उपयोग करने न जाएँ। हमेशा 2-3 के ग्रुप में रहें या जरूरी हो तो टीचर को साथ ले जाएँ। चाहे कमरे में चेंज करना हो या स्वीमिंग पूल में नहाना हो, कोशिश करें कि इस समय भी सतर्कता बरतें। यदि अनजान शहर में शॉपिंग करने जा रही हैं तो वहां भी ड्रेस के लिए ट्रायल रूम का प्रयोग सावधानी से करें।
    संकेत को पहचाने और सतर्क रहे
  3. बिटिया को बताएं कि कभी भी किसी पर आँख मूंदकर भरोसा न करे। जीवन में हर मोड़ पर यह सलाह बेटी के काम आएगी लेकिन जब वह आपसे दूर किसी शहर में है तो यह सलाह वहां भी उसकी रक्षा का काम करेगी। उसे समझाएं कि उसे सहज ही किसी पर भी भरोसा नहीं करना है। खासकर तब जब कोई उसे अकेले में कहीं चलने को कहे, केवल उसी को कोई वस्तु खाने-पीने के लिए दे या किसी एक्टिविटी में केवल उसे ही शामिल करने पर जोर दे। फिर चाहे वह उसकी कोई मित्र हो या टीचर ही क्यों न हो। स्कूल ट्रिप का मतलब होता है, साथ मिलकर घूमने, फिरने, खाने-पीने का आनंद लेना। ऐसे में किसी का अकेले चलने के लिए फोर्स करना खतरे का संकेत भी हो सकता है। इसलिए ऐसी किसी भी स्थिति से बचें।
Advertisement Carousel
Share.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
October 2026
M T W T F S S
 1234
567891011
12131415161718
19202122232425
262728293031