बेमेतरा जिले के किसान भाईयों के लिए कृषि विज्ञान केन्द्र बेमेतरा के कृषि वैज्ञानिकों ने मौसम आधारित कृषि सलाह दी है। उन्होने बताया कि देर से रोपा किये गये धान फसल की उम्र 20 से 25 दिन हो जाने पर निंदा नियंत्रण हेतु विसपायरीबैक सोडियम सक्रिय तत्व (10 प्रतिशत) 250 मि.ली. प्रति हेक्टेयर या फिनाक्साप्राप पी इथाइल सक्रिय तत्व (9.3 प्रतिशत) 625 मि.ली. प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें। किसान भाईयों को सलाह हैं कि मौसम साफ रहने एवं वर्षा न होने पर निंदा नियंत्रण हेतु दवाई का छिड़काव करें। 30 से 40 दिन की अवस्था में जहां धान की फसल कन्से निकलने की अवस्था में हो वहां नत्रजन की दूसरी मात्रा का छिड़काव करें जिससे कन्से की स्थिति में सुधार आयेगा। फसल में कीट या खरपतवार होने की स्थिति में दोनों के नियंत्रण के बाद ही यूरिया (40 कि.ग्रा./हेक्टर) का छिड़काव करें। धान की खेती में 5 से.मी. से अधिक पानी न भरने दे। पानी अधिक होने की स्थिति में उसे तत्काल खेत से बाहर निकाले। अधिक पानी भरा होने से धान में कन्सों की संख्या प्रभावित होती है।
कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि धान फसल पर पीला तना छेदक कीट के वयस्क दिखाई देने पर फसल का निरीक्षण कर तना छेदक के अंडा समूह को एकत्र कर नष्ट कर देंवे साथ ही डेड हार्ट (सूखी पत्ती) को खीचकर निकाल देंवे। कीटो की संख्या अधिक मात्रा होने पर फिपरोनिल 5 एस.सी. एक लीटर प्रति दर से छिड़काव करें। लगातार बादल छाए रहने एवं वर्षा होने के कारण कीट व्याधि प्रकोप बढ़ने की अधिक संभावना रहती है। किसान भाईयों अपनी खेती की सतत निगरानी करें। किसान भाई मौसम साफ रहने एवं वर्षा न होने पर कीटनाशक हेतु दवाई का छिड़काव करें।
जिन स्थानों पर सोयाबीन की फसल में गर्डल बीटल का प्रकोप शुरू हो गया हो वहां पर थइक्लोपीड 21.7 एस.सी. 650 मि.ली./हे. अथवा प्रोफेनोफास 50 ई.सी. (1.25 ली./हे.) की दर से छिड़काव करें। सोयाबीन की फसल में पत्ती खाने वाली इल्लियों तथा सफेद मक्खी के नियंत्रण हेतु पूर्व मिश्रित कीटनाशक बीटासायफ्लुथ्रीन और इमिडाक्लोपीड 350 मि.ली./हे. अथवा थायमिथाक्सम और लेम्बडा सायहेलोथ्रीन 125 मि.ली./हे. की दर से छिड़काव करें। इस उपाय से तना मक्खी का भी नियंत्रण होगा। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार आने वाले दिनों में अधिकांश स्थानों में हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना को ध्यान में रखते हुए किसान भाई मौसम साफ रहने पर दवाई का छिड़काव करें।
साग सब्जी हेतु सामयिक सलाह कद्दूवर्गीय सब्जियों को अच्छे से सहारा प्रदान करें,  गोभीवर्गीय सब्जियों का थरहा तैयार करें,  शिमला मिर्च की नर्सरी तैयार करें, खरीफ प्याज को खेत में रोपाई करें, अदरक एवं हल्दी की फसलों में हल्की मिट्टी चढ़ाकर दूसरी बार पलवार करें। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार आने वाले दिनों में अधिकांश स्थानों में हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना को ध्यान में रखते हुए किसान भाई जल निकास की व्यवस्था कर लेवें।

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