छत्तीसगढ़ राज्य आज विकास के मूल मंत्र को अंगीकार करते हुए देश के विकसित राज्यों के समकक्ष खड़ा होने को प्रयत्नशील है। नवंबर 2000 को गठित 3 राज्यों में से एक छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण हुआ। छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण की आकांक्षा तो लंबे समय से अर्थात आजादी के पूर्व से ही मनवा कुर्मी समाज के वरिष्ठ सपूतों ने बीड़ा उठा लिया था। छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज के वीर जवानों में से एक स्वर्गीय अनंत राम बर्छिहा जी थे। जिन्होंने बरार राज्य के नागपुर विधानसभा में कौशल क्षेत्र से एक प्रथम विधायक के रूप में अपनी आवाज को वहां बुलंद किया करते थे। ऐसे महापुरुष के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को देखकर नवयुवक एवं बहू बेटियों ने भी मिलकर देश को स्वतंत्रता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वे कम पढ़े लिखे होने के बाद भी आजाद भारत के पूर्व वे स्वतंत्र नेता और समाज सुधारक के रूप में अपनी भूमिका निभाई है। उनका प्रथम योगदान अनुसूचित वर्ग समाज के भाइयों का हजामत बनाकर सत्कार्य में प्रेरित करना। दूसरा विधुर युवा को प्रोत्साहन देते हुए सर्वप्रथम अपने छोटे भाई सुखराम वर्छिहा को प्रेरित कर गांव के ही एक विधुर महिला को भाई बहू के रूप में स्वीकार करना। तीसरा उन्होंने समाज को विकसित करने के लिए दहेज प्रथा को बन्द करने के उद्देश्य से अपनी बेटी राधा को दोना में पांव पखारकर विदा किया। अनुसूचित जाति के निस्तारी हेतु जबकि उस जमाने में पानी की मारामारी अकाल ग्रस्त अवस्था में होने से उन्होंने स्वयं अपने बाड़ी के दो कुंवा निकासी हेतु सर्वसमाज के लिए खुला छोड़ दिया।

उमाकांत वर्मा, प्रदेश अध्यक्ष अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रिय महासभा एवं महासचिव छत्तीसगढिय़ा सर्व समाज महासभा

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