दुर्गा पूजा सिर्फ पश्चिम बंगाल का त्योहार नहीं है, बल्कि इसकी रौनक पूरे भारतवर्ष में देखी जाती है. दुर्गा पूजा कहो या पिर नवरात्रि यह हिन्दुओं का मुख्य वार्षिक त्योहार है, जो समान धार्मिक महत्व के साथ देशभर में मनाया जाता है. वहीं बिहार प्राचीन काल से समृद्ध संस्कृति वाला राज्य रहा है. वैसे अगर बात बिहार की हो तो बिहार रामायण काल से लेकर महाभारत तक में हमेशा जिक्र में रहता है. कई धर्मों का जन्म भी इस राज्य से हुआ है. यहां धार्मिक महोत्सव को विभिन्न तरीकों से मनाया जाता है. इस साल 26 सितंबर से शारदीय नवरात्र शुरू होने जा रहे हैं. तो चलिए नवरात्रि के शुभारंभ होने से पहले हम आपको बताते है कि इन नवरात्रि में आप बिहार में किन नौ देवियों के दर्शन कर सकते है. इन मंदिरों के दर्शन मात्र से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते है.
मां मंगला गौरी मंदिर
बिहार के बोधगया मार्ग पर स्थित भस्म कुट पर्वत पर मां मंगला गौरी का प्रसिद्ध शक्तिपीठ मंदिर है. कहा जाता है कि यहां देवी सती का स्तन गिरा था. नवरात्रि में इस मंदिर में दर्शन करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है. यह मंदिर ऊंचाई पर अवस्थित है. जिसके वजह से इसको सीढ़ीनुमा बनाया गया है. इस मंदिर पर चढऩे के लिए भक्तों को 115 सीढय़िां चढ़कर जाना पड़ता है. इस मंदिर परिसर में कई देवी-देवताओं की मूर्तियां भी हैं.
बड़ी पटनदेवी मंदिर
राजधानी पटना में स्थित पटन देवी मंदिर शक्ति भक्तों की उपासना का मुख्य केंद्र है. खासतौर पर यहां नवरात्रि में काफी भीड़ होती है. कहा जाता है कि यहां देवी सती की दाहिनी जांघ गिरी थी. बताया जाता है कि उत्खनन के दौरान यहीं से महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की तीन प्रतिमाएं मिली थी, जिसे यहीं पर स्थापित कर दिया गया. जानकारी के मुताबिक ये तीनों प्रतिमाएं काले पत्थर की बनी है. ज्यादातर लोग इस स्थल को बड़ी पटनदेवी के नाम से जानते है. पटन देवी दो हैं. जिसमें एक छोटी पटन देवी और दूसरी बड़ी पटन देवी के नाम से जानी जाती है. इन दोनों के माता के अलग-अलग मंदिर हैं.
छोटी पटनदेवी मंदिर
राजधानी पटना की नगर रक्षिका भगवती पटनेश्वरी हैं, जो छोटी पटनदेवी के नाम से जानी जाती है. छोटी पटनदेवी मंदिर परिसर में महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती विघमान हैं. नवरात्रि में यहां भक्त बड़ी तादाद पर यहां आते है. कहा जाता है कि यहां देवी सती का पट और वस्त्र गिरे थे.
शीतला मंदिर
बिहार के नालंदा जिले के मघड़ा गांव में स्थित प्राचीन शीतला मंदिर भी प्रसिद्ध शक्तिपीठों में से एक है. इस मंदिर में पूजा करने को लेकर मान्यता है कि श्रद्धालुओं को निरोगी काया की प्राप्ति है. कहा जाता है कि यहां देवी सती के हाथों का कंगन गिरा था. इस मंदिर में नवरात्रों में बड़ी तादाद में भक्त यहां आते है. शीतला मंदिर की आस्था है कि यहां जल अर्पित करने से कई बीमारियां खत्म हो जाती है.
उच्चैठ सिद्धपीठ मंदिर
बिहार के मधुबनी जिले के बेनीपट्टी गांव में स्थित मां काली का सिद्धपीठ, उच्चैठ भगवती का मंदिर उपासना का केंद्र है. उच्चैठ भगवती मंदिर का ऐतिहासिक महत्व है. कहा जाता है कि यहां महान कवि कालिदास को माता काली ने वरदान दिया था. जिसके बाद मूर्ख कालिदास मां का आशीर्वाद पाकर ही महान कवि के रूप में विख्यात हुए थे. इस मंदिर में माता का सिर्फ कंधे तक का हिस्सा ही नजर आता है. माता का सिर नहीं होने के कारण इन्हें छिन्नमस्तिका दुर्गा के नाम से भी जाना जाता है. यहां नवरात्रि में भक्तों की लंबी कतार लगती है.
मां चंडिका देवी मंदिर
बिहार के मुंगेर जिला मुख्यालय से चार किलोमीटर दूर गंगा के किनारे स्थित मां चंडिका का मंदिर प्रसिद्ध शक्तिपीठ में से एक है. इसके पूर्व और पश्चिम में श्मशान है. कहा जाता है कि यहां मां सती की दाई आंख गिरी थी. यहां पर सोने में गढ़ी आंख स्थापित है. यहां आंखों के पीडि़त रोग से पूजा करने आते हैं और यहां से काजल लेकर जाते हैं. मंदिर चंडिका देवी के बारे में बताया जाता है कि लंका विजय के बाद भगवान राम ने यहां पर देवी की पूजा की थी.
मुंडेश्वरी मंदिर
माता मुंडेश्वरी मंदिर बिहार के कैमूर जिले के पहाड़ों के बीच पंवरा पहाड़ी के शिखर पर मौजूद है. माता मुंडेश्वरी मंदिर को शक्तिपीठ भी कहा जाता है. नवरात्रों में मंदिर में बहुत भीड़ होती है. दूर-दूर से भक्त दर्शन करने के लिए यहां आते है. बताया जाता है कि इस मंदिर में बिना खून बहाए बकरे की बलि दी जाती है. कहते हैं कि माता के द्वार पर आकर जो भक्ति करने का प्रसाद मिलता है. इसका अहसास काफी अनोखा होता है.
बुढ़ीमाय माय मंदिर
बिहार के मधुबनी जिला मुख्यालय से थोड़ा दूर मंगरौनी गांव स्थित है. जहां बूढ़ीमाय दुर्गा मंदिर स्थित है. यह एक सिद्ध पीठ स्थान है. इस मंदिर में पूजा करने वालों की मनोकामना देवी माता पूरी करती हैं. नवरात्रों में खासतौर पर भक्तों की काफी भीड़ उमड़ती है. बूढ़ीमाय दुर्गा मंदिर को लेकर कहा जाता है कि यहां की भगवती का रूप है जो कामाख्या का प्रतीक है.
अंबिका भवानी मंदिर
छपरा में स्थित अंबिका भवानी मंदिर प्राचीन धार्मिक स्थल है. यह मंदिर पूरे भारत वर्ष में ऐसा है जहां माता की या फिर किसी भी भगवान की कोई मूर्ति नहीं है. मान्यता है कि इस जगह को देवी सती के जन्म और मृत्यु स्थल के रूप में जाना जाता है. मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां देवी सती के पिता दक्ष प्रजापति का राज्य था. यहां नवरात्रि में जाने से भक्तों की सभी मनोकामना पूर्ण होती है.

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