महिलाओं ने आकर्षक चूड़ी, कंगन, मंगलसूत्र बनाकर आर्थिक स्वावलंबन की चुनी राह

महिलाओं को आरसेटी से मिला है प्रशिक्षण, सी मार्ट में विक्रय के लिए उपलब्ध रहेगी ज्वेलरी

कोरबा जिले की महिलाएं आर्टिफिशियल ज्वेलरी निर्माण के लिए बड़े शहरों और वृहद उद्योगों पर निर्भरता की बात को गलत साबित कर रही है। जिले में बिहान की समूह की महिलाएं  नवाचार का बेहतरीन नमूना पेश करते हुए गांव में ही आर्टिफिशियल ज्वेलरी का निर्माण कर रही है। समूह की महिलाएं ज्वेलरी निर्माण से जुड़कर स्वरोजगार और स्वावलंबन की मिसाल पेश कर रही हैं। विकासखंड कोरबा के ग्राम रजगामार की 15 दीदियां आजीविका संवर्धन के लिए आर्टिफिशियल ज्वैलरी निर्माण में लगी हुई हैं। राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत सीता महिला ग्राम संगठन कि महिलाएं चूड़ी, कंगन, झुमका आदि के सुंदर और आकर्षक नमूने बनाकर ना सिर्फ नवाचार कर रही हैं, बल्कि आर्थिक रूप से भी मजबूत होने का रास्ता अपना रही है। समूह द्वारा किए जा रहे आर्टिफिशियल ज्वेलरी निर्माण से समूह की महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है। साथ ही अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत साबित हो रहा है। श्री नूतन कुमार कंवर, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत ने बताया की समूह की महिलाएं बड़ी मेहनत और लगन से आर्टिफिशियल ज्वेलरी बनाने के काम में लगी हुई है। महिलाओं द्वारा बनाए गए ज्वेलरी बहुत ही सुंदर और आकर्षक है। उन्होंने महिलाओं का उत्साहवर्धन करते हुए स्वसहायता समूह की महिलाओं के आर्टीफिशियल ज्वेलरी को बाजार उपलब्ध कराने के लिए सीमार्ट में रखने के निर्देश एनआरएलएम को दिये है। इसके साथ ही आर्टीफिशियल ज्वेलरी के व्यवसाय विकास हेतु बैंक से सहयोग कराने के निर्देश दिये है। सीता महिला ग्राम पंचायत रजगामार की अध्यक्ष श्रीमती कविता श्रीवास एवं रजिया बेगम ने बताया कि उनके ग्राम संगठन की 15 महिलाएं आकर्षक रंग बिरंगी चूडियां, कंगन, माथाटीका, राधा सेेट जो कि (फोम एवं फ्लावर) से बनाया है जो कि हल्दी कार्यक्रम में महिलाओं के द्वारा पहना जाता हैं। कान की बाली, झुमका, मोती वाले ब्रेसलेट, अंगूठी चोकरहार (मोतीहार) गले के पेडेंट मोतीवाला, मंगलसूत्र, करधन, बाजूबंध आदि ज्वेलरी उन्होने सामूहिक रूप से तैयार की हैं। यह ज्वेलरी उनके द्वारा मात्र 75 घंटे में तैयार की गई है, जिसकी बाजार मूल्य 20 हजार रूपये से ज्यादा मिलने की आशा है। ग्राम संगठन की महिलाओं ने अपने रोजाना के कार्यों से फुरसत होकर दोपहर में 2 बजे से 5 बजे तक सामुदायिक भवन में ज्वेलरी तैयार की हैं। महिलाओं द्वारा तैयार इस आर्टीफिसियल ज्वेलरी को फैंसी स्टोर रजगामार में बिक्री हेतु रखा गया हैं। उन्होने बताया कि में यह ज्वेलरी बाजार दर से सस्ते मूल्य पर आर्कषक रूप में उपलब्ध है।

           उल्लेखनीय है की बिहान की दीदियों को आर्टिफिसियल ज्वेलरी बनाने का 13 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण आरसेटी कोरबा के द्वारा दिया गया है। इस संबंध में श्री अरविंद विश्वास डारेक्टर आरसेटी कोरबा ने बताया कि भारत में 850 करोड़ रूपये का आर्टीफिशियल ज्वेलरी बाजार है। जिसमें से 150 करोड़ रूपये घरेलू उत्पाद का हैं । इस कार्य में घरेलू उत्पाद बढाकर इसमें महिलाओं के लिए काफी सम्भावनाएं है। त्यौहारी सीजन को देखते हुए यह कार्य समूह की महिलाओं को आजीविका संवर्धन हेतु लाभकारी होगा। उन्होने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान बैकिंग, मार्केट रिसर्च, कस्टमर बिहेवियर का प्रशिक्षण भी महिलाओं को उनके व्यवसाय विकास हेतु दिया गया है।

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