बस्तर का दशहर अपने प्राचीन धरोहर और समृद्ध परंपराओं की वजह से विश्वप्रसिद्ध है। ये तो बात हुई बस्तर दशहरे की पर क्या आपको पता है बस्तर दशहरा पर्व के बाद अब बस्तर की दिवाली को खास बना रही हैं बस्तर की महिलाएं। जगदलपुर के स्व सहायता समूह की ये महिलाएं हैं, जिनके समूह का नाम है स्वच्छता ही सेवा है। जैसा नाम वैसा ही काम। दरअसल ये महिलाएं दिवाली के लिए इको फ्रैंडली दिए बना रही हैं। जिनके जलने से किसी तरह का कोई प्रदूषण नहीं होगा। साथ ही इन्हें बनाने के लिए मिट्टी का भी नुकसान नहीं किया गया है। इन गोबर के दिए को बनाने के लिए स्वच्छता ही सेवा है समूह की महिलाओं ने निगम से गोबर खरीदा और उनके दिए बनाकर बाजार में बेच रही हैं। गोबर के दिए से हो रही आमदनी को लेकर महिलाएं काफी खुश नजर आ रही हैं। उनका कहना है कि दिए बनाने के लिए वो मिट्टी का नुकसान नहीं करती हैं। गोबर के दिए बनाकर उस पर प्राकृतिक रंगों से बस्तर की कलाकृतियों को उकेरती हैं। इन महिलाओं के बने दिए जगदलपुर की अराध्या मां दंतेश्वरी मंदिर के पास 20 से 30 रुपए के पैकेट में निगम की सहायता से बेचे जा रहे हैं।

स्वच्छता ही सेवा है स्व सहायता समूह की प्रभारी सदस्य, पूनम विश्वकर्मा का कहना है कि उन्होंने पिछले वर्ष भी गोबर के दिए से लगभग 2500 रुपए की कमाई की थी। समूह में 78 महिलाएं हैं, जो वार्डों से कचरा कलेक्शन करने के बाद सेंटर में आकर दिया बनाने का काम करती हैं।

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