राजस्थान का शायद पहला मामला होगा जिसमें मां ने पढ़ाई करने के लिए 7 माह की नवजात बच्ची को फेंक दिया. पुलिस ने चार महीने पुराने मामले का खुलासा करते हुए नर्सिंग की छात्रा को गिरफ्तार कर लिया. कोर्ट ने राहत देते हुए छात्रा को छोडऩे का आदेश दिया. नवजात का डीएनए नर्सिंग की छात्रा से मैच कर गया. चित्तौडग़ढ़ के सेक्टर एक में 26 जुलाई को नन्ही बच्ची के रोने की आवाज आ रही थी. आवाज सुनकर अजहर और पप्पू नामक दो युवक राजस्थान स्टील दुकान के पीछे गए. दोनों ने नवजात को कबाड़ से बारिश में भीगती बच्ची को बचाया और सूचना देकर पुलिस को बुलाया. पुलिस ने बच्ची को हॉस्पिटल पहुंचाया. कबाड़ की दुकान के पास एक गर्ल्स हॉस्टल है. महिला थाना प्रभारी सुशीला खोइवल ने बताया कि पुलिस ने गर्ल्स हॉस्टल में जाकर पूछताछ शुरू की. तफ्तीश के दौरान एक छात्रा थोड़ी घबराई हुई दिखी. लावारिस बच्ची के बारे में पूछने पर मना कर दिया. पुलिस ने छात्रा का डीएनए लिए सैंपल लिया और टेस्ट के लिए जयपुर भेजा. डीएनए रिपोर्ट नवजात से मैच हो गई. मामला साफ हो जाने के बाद पुलिस ने छात्रा को गिरफ्तार किया. पुलिस जांच में सामने आया कि छात्रा की 2 साल पहले शादी हुई थी और शादी के बाद गुजरात के सूरत में पति के साथ रह रही थी. सूरत रहने के दौरान छात्रा का नर्सिंग में चयन होने पर चित्तौडग़ढ़ आ गई. चित्तौडग़ढ़ आने के बाद गर्भवती होने की पुष्टि हुई. कॉलेज में शर्म से बचने और और पढ़ाई जारी रखने के लिए गर्भ गिराने की गोलियां खाई. 7 माह में नर्सिंग छात्रा की डिलीवरी हो गई. जन्म के बाद नवजात बच्ची को हॉस्टल की छत से नीचे फेंक दिया. जमीन पर गिरने के बावजूद नवजात जिंदा बच गई. हैरानी की बात है कि डीएनए मैच होने के बाद भी छात्रा ने अपनी बेटी को स्वीकार करने से इनकार कर दिया. पुलिस के सामने बच्ची से पल्ला झाड़ती रही. बच्ची अभी बाल गृह केंद्र में स्वस्थ है.

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