जांजगीर-चाम्पा. लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती…कोशिश करने वालों की हार नहीं होती..नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है…चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है..मन का विश्वास रगों में साहस भरता है..चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है..आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती..कोशिश करने वालों की हार नहीं होती…डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है,जा जा कर खाली हाथ लौटकर आता है..मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी मेंबढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी मेंमुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती…कोशिश करने वालों की हार नहीं होती…असफलता एक चुनौती है, स्वीकार करोक्या कमी रह गई, देखो और सुधार करोजब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुमसंघर्ष का मैदान छोड़ मत भागो तुम,कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती…कोशिश करने वालों की हार नहीं होती…इस प्रेरणादायी कविता को बिना देखे जब पांचवीं की एक बालिका ने सुनाई तो कलेक्टर श्री तारन प्रकाश सिन्हा ने उनकी स्मृति और साहस की सराहना करते हुए न सिर्फ तालिया बजाई, उनकी कोशिशों और सफलता को स्वीकार करते हुए बालिका को पुरस्कार देकर कक्षा के अन्य विद्यार्थियों को भी अपनी सफलता के लिए जीवन में ऐसे ही कोशिश जारी रखते हुए आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। जिले के संवेदनशील कलेक्टर श्री तारन प्रकाश सिन्हा को जिले में पाँच माह होने वाले हैं..वे जिले के इस कोने से लेकर उस कोने तक गाँव के अंतिम छोर में विकास कार्यों का जायजा ही नहीं ले रहे हैं.. ग्रामीणों को सरकार की योजनाओं को बताते हुए आगे बढ़ने की बात कह रहे हैं… आंगनबाड़ी केंद्र में जा-जाकर बच्चों को स्वस्थ और सुपोषित बनाने उन्हें आंगनबाड़ी में नियमित रूप से खाना देने,अंडा, केला देने के निर्देश देते हुए जाँच भी कर रहे हैं..। अस्पताल से लेकर स्कूल और सरकारी दफ्तरों से लेकर गौठान के साथ योजनाओं का लाभ उठाकर अपनी खेतों में धान के बदले अन्य फसल लेने वाले हितग्राहियों की खेतों में भी वे कीचड़ व मिट्टी की परवाह किये बिना पैदल पहुँच रहे हैं..। इसी निरीक्षण की कड़ी में वे जब पामगढ़ के बारगांव के प्राथमिक शाला पहुँचे तो पांचवीं क्लास में शिक्षक विद्यार्थियों को “हार नहीं होती” कविता पढ़ा रहे थे। यहाँ पहुँचते ही कलेक्टर ने एक छात्रा को जब बिना देखे यह कविता सुनाने कहा तो छात्रा प्रक्षा ने पूरी कविता सुना दी। छात्रा की इस कोशिश और हार नहीं मानते हुए कविता वाचन की कलेक्टर श्री सिन्हा ने खूब प्रशंसा करते हुए तालियां बजवाई और उपहार दिए। कलेक्टर ने क्लास में 19 का पहाड़ा सुनाने कहा तो एक छात्र ने बिना किताब देखे पहाड़ा भी सुनाया। कलेक्टर ने पहाड़ा सुनाने वाले छात्र को पेन और सभी विद्यार्थियों को चॉकलेट देते हुए यहाँ क्लास ले रहे शिक्षक भोजराम गुप्ता के अध्यापन के तौर तरीकों से प्रभावित होकर शिक्षक को अपनी कलम भेंट कर दी। कलेक्टर ने विद्यार्थियों को अच्छे से पढ़ने और आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हुए शिक्षकों को भी अपना कर्तव्य सही ढंग से निभाने की बात कही।
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती, यह साबित करते हुए इस बालिका ने कलेक्टर से पाई यह इनाम
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