शहर में किडनी के मरीज बढ़ रहे हैं। एमजीएम और सदर अस्पताल में डायलिसिस कराने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 2021 में सदर अस्पताल में मात्र 58 डायलिसिस हुई थी, वहीं 2022 में अबतक 833 मरीजों की डायलिसिस हो चुकी है।
इस साल अब तक 3 हजार डायलिसिस
एमजीएम में 2021 में करीब 1500 डायलिसिस हुई थी, जबकि 2022 में अबतक तीन हजार डायलिसिस हो चुकी है। दो साल में डायलिसिस कराने वाले मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। दोनों अस्पताल में बीपीएल लालकार्ड धारी और आयुष्मान कार्डधारियों के लिए डायलिसिस निशुल्क है, जबकि सामान्य लोगों के लिए 1050 रुपये में डायलिसिस उपलब्ध है।
इन कारणों से किडनी संबंधी होती हैं बीमारियां
डॉक्टरों के अनुसार, किडनी से संबंधित बीमारियां डायबिटीज, हाई ब्लडप्रेशर और धमनियों के सख्त होने के कारण होती है। हालांकि इन रोगों में से कई किडनी के सूजन के कारण भी हो सकते हैं। इस स्थिति को नेफ्राइटिस कहते हैं। मेटाबॉलिक डिस ऑर्डर के अलावा कुछ ऐनाटॉमिक डिस ऑर्डर से भी किडनी संबंधी बीमारियां होती हैं। कई बार ये वंशानुगत भी होती हैं।
शरीर को संतुलित रखती है किडनी
डायलिसिस किडनी का काम तब तक करती है, जबतक कि वे क्रियाशील न हों। यह तब किया जाता है, जब किडनी ठीक से काम नहीं कर पाती हैं। एक व्यक्ति को अपने शरीर को संतुलन में रखने के लिए डायलिसिस से गुजरना पड़ता है। डायलिसिस की प्रक्रिया अपशिष्ट, सॉल्ट और अतिरिक्त पानी को हटा देती है। यह खून में कुछ रसायनों जैसे सोडियम, बाइकार्बोनेट और पोटैशियम के स्तर को ठीक रखती है। ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में भी सहायक होती है।
एक स्वस्थ किडनी रोज लगभग 1500 लीटर रक्त को छानने का काम करती है। यदि किडनी ठीक से काम नहीं करती है तो रक्त में अपशिष्ट जमा हो सकते हैं। इससे गंभीर स्वास्थ्य समस्या होती है, जिससे मरीज कोमा में जा सकता है और उसकी मौत भी हो सकती है। सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाला ने बताया कि, एमजीएम के बाद सदर अस्पताल में डायलिसिस शुरू हुई थी। दो साल में 891 डायलिसिस हो चुकी है।

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