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पूस की रातें गरीबों के लिए बहुत ही दुखदाई होती हैं। मुंशी प्रेमचंद्र की पूस की रात की कहानी तो सभी को याद होगी, लेकिन खत्म हो रहे पूस की एक रात बरेली में बंडा के ढुकरी बुजुर्ग गांव के गंगाराम की पत्नी गीता पर भारी पड़ गई। बुधवार रात गीता की मौत हो गई। गंगाराम के अनुसार, गीता को बुधवार रात बहुत ठंड लगी। घर में न तो रजाई थी और न ही गद्दा। खाना तो दूर बर्तन तक नहीं हैं। गरीबी के हालात ऐसे कि इस भीषण ठंड में गंगाराम और उसकी पत्नी गीता को धान की पराली पर लेटना पड़ रहा है। गांव ढुकरी बुजुर्ग निवासी गंगाराम ने बताया कि वह खुटार थाना क्षेत्र के गांव उजागरपुर का रहने वाले हैं। सगे भाई से विवाद होने पर करीब 20 वर्ष पहले वह ढुकरी में अपनी बहन नन्ही व बहनोई भिखारी लाल के पास आकर रहने लगे थे। जैसे-तैसे मजदूरी से उन्होंने गांव में ही थोड़ी सी जमीन खरीद ली और पत्नी गीता देवी के साथ उसी जमीन में बने एक टिन शेड वाले कमरे में रहने लगे। जैसा गंगाराम ने बताया कि बुधवार रात उसकी पत्नी को कड़ाके की ठंड लगने लगी, जिससे उसकी मौत हो गई। गंगाराम ने बताया कि उसके पास इतनी पूंजी नहीं है कि वह रजाई और बिस्तर ला सके, यहां तक कि उसके पास चारपाई भी नहीं है, पत्नी सहित वह कमरे में धान की पराली पर लेटा करता था। गंगाराम को पत्नी की मौत के बाद उसके अंतिम संस्कार के लिए उसे गांव में भीख मांगनी पड़ी। जैसे तैसे करके उसने अपनी पत्नी का अंतिम संस्कार किया। ढुकरी बुजुर्ग गांव का प्रधान गंगाराम का रिश्तेदार है। इसके बाद भी गंगाराम सरकार की कोई भी योजना का लाभ नहीं मिल सका। उसे न तो राशन कार्ड, न आवास और न शौचालय का लाभ दिया गया। एडीएम प्रशासन रामसेवक द्विवेदी ने बताया कि एसडीएम को मामले की जानकारी दी जा रही है। ग्रामीण की आपदा प्रबंधन से हर सम्भव मदद की जाएगी। एसडीएम पुवायां हिमांशु उपाध्याय ने बताया कि राहत आपदा के तहत हर संभव मदद दी जाएगी, कानूनगो को मौके पर भेजा जा रहा है। ग्राम प्रधान चेतराम ने बताया कि गंगाराम उसका रिश्तेदार है, जिसका आधार कार्ड नहीं बना था, जिसकी वजह से उसे कोई लाभ नहीं मिल पाया, अभी हाल ही में उसका आधार कार्ड बना है।

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