होली से 8 दिन पहले होलाष्टक लग जाता है। इन दिनों की अवधि में मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। वहीं, होलिका दहन के बाद दोबारा शुरू किया जाता है। इस साल होलिका दहन 7 मार्च, मंगलवार को किया जाएगा। ऐसे में होलाष्टक 28 फरवरी से शुरू होगा। आइए जानते हैं होलाष्टक शुभ क्यों नहीं है। इस दौरान किन चीजों को नहीं करना चाहिए। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार होलाष्टक की अवधि में ग्रहों का गोचर शुभ नहीं होता है। इस अवधि में ग्रह उग्र स्वभाव के हो जाते हैं। इसलिए होलाष्टक में किए गए कार्यों से दुष्परिणाम उत्पन्न होने का खतरा रहता है। साथ ही कलह, हानि और बीमारियां बढ़ जाती है।
होलाष्टक में न करें यह काम

  • होलाष्टक के समय विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण और उपनयन संस्कार आदि अनुष्ठान वर्जित हो जाते है।
  • होलाष्टक के 8 दिनों में हवन नहीं करना चाहिए। साथ ही निवेश और नए व्यापार भी नहीं शुरू किया जाता है।
  • होलाष्टक की अवधि में घर, गहने और वाहन की खरीदारी नहीं करनी चाहिए। साथ ही मकान का निर्माण शुरू नहीं करना चाहिए।
    होलाष्टक का महत्व
    वैदिक ज्योतिष के अनुसार होलाष्टक के समय देवी-देवताओं की पूजा-पाठ करना शुभ माना गया है। इस अवधि में भगवान विष्णु की उपासना करने से सभी तकलीफ दूर हो जाती हैं। साथ होलाष्टक के अवधि में महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए। ऐसा करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।
    नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। छत्तीसगढ़ राज्य न्यूज पोर्टल लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।
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