चैत्र नवरात्रि 22 मार्च बुधवार से प्रारम्भ हो रहे हैं। यह नवरात्रि 30 मार्च दिन गुरुवार को समाप्त होंगे। इस बार नवरात्रि का प्रारम्भ पंचक से शुरु हो रहा है। पंचक 19 मार्च से 23 मार्च तक रहेगा। चैत्र नवरात्रि का प्रारम्भ दो दिन पंचक में पड़ रहा है। नवरात्रि का अधिकांश समय पंचक के बाद का है इसलिए नवरात्रि पर पंचक की छाया लम्बे समय तक नहीं रहेगी। इस बार नवरात्रि का प्रारम्भ शुक्ल योग में शुरु होगा। शुक्ल योग सुबह 09 बजकर 18 मिनट तक ही रहेगा। इस बीच कलश स्थापना भक्तगण कर सकते है। इसके बाद ब्रह्म योग शुरु होगा। ब्रह्म योग भी इसी दिन 09 बजकर 19 मिनट पर प्रारम्भ होगा जो कि अगले दिन तक बना रहेगा। भक्तगण ब्रह्म योग में भी कलश स्थापना कर सकते है। देवी मां की कलश स्थापना के साथ घर की सफाई आदि पर भक्तगण को विशेष ध्यान देना चाहिए। घर को गंगाजल छिड़ककर पवित्र बनायें। मां स्वच्छ स्थान पर भक्त के पुकारने पर शीघ्र ही आ जाती है और अपनी कृपा दृष्टि बनायें रखती है। भक्त मां को विशेष आह्वाहन के साथ पुकारेगें तो मां की सद्कृपा भक्तगण पर निरन्तर बनी रहेगी।

व्रत न रखकर भी भक्त मां को कर सकते हैं प्रसन्न – मां के विभिन्न रुपों का अपना अलग-अलग महात्म है। मां अपने विभिन्न रुपों में आकर भक्तगण को आशीर्वाद प्रदान करती है। जो भक्त नौ दिनों तक व्रत रखते है। वे नव देवियों की कृपा प्राप्त करने में सफल होते है। हालांकि जो लोग नौ दिन व्रत नहीं रह पाते है वे भी यदि श्रद्धापूर्वक मां की पूजा या आराधना करते है तो मां उन पर भी अपनी कृपा बरसाती है। शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघंटा, कुष्मांडा, स्कन्दमाता, कात्यायनी देवी, कालरात्री मां, महागौरी मां और सिद्धदात्री मां,भक्तगण इन नौ देवियों की पूजा एवं आराधना करते है तो मां उनके सभी अमंगलों को दूर करती है। उनके जीवन में मंगलकारी स्थितियों की वर्षा करती है। नौकरी, व्यापार, कृषि या अन्य किसी तरह का कार्य करने वाले यदि मां को इस नवरात्रि में श्रद्धापूर्वक पुकारते है तो मां उनकी समस्त बाधाओं का हरण कर लेती है। भक्तगण में ऊर्जा भरती है। जिससे वह शक्ति-संपन्न होकर अपनी कर्मठता से मां के आशीर्वाद से विशेष उन्नति करने में सफल हो सकता है।

नवरात्रि का शुभारंभ बुधवार के दिन लाभकारी – इस बार का नवरात्रि कई मामलों में अच्छा है । बुधवार के दिन से शुरु होने के कारण कार्य-व्यापार से जुड़े लोगों के लिए यह नवरात्रि विशेष शुभ रहेगा। बुधवार गणेश जी का दिन है और गणेश जी शुभ कार्यों के अधिष्ठाता देवता माने जाते है। इसलिए जातकों के लिए यह नवरात्रि मंगलकारी सिद्ध हो सकता है। बुध ग्रह भी कार्य-व्यापार के लिए अनुकूल माना गया है। नवरात्रि का अन्त गुरुवार को होगा। गुरु ज्ञान का प्रतीक है। इसलिए भक्तगण अपनी साधना एवं ज्ञान से देवी मां का अलाैकिक दर्शन एवं आशीर्वाद पाने में सफल हो सकते है।

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