छत्तीसगढ़ प्रादेशिक मानव संसाधन विकास समिति के प्रदेश प्रवक्ता बिरेंदर सिंह के समझौता योग्य अपराधो में लोक हित में पत्र लिख प्रारंभिक गिरफ्तारी संबंधी अपराधो में संशोधन की मांग केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू से की है। बिरेंदर सिंह ने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराते हुए लिखा की सीआरपीसी तथा आईपीसी में वर्णित समझौता योग्य अपराधों में पुलिस /न्यायिक अभिरक्षा संबंधित अपराधों में वर्तमान समय अनुसार संशोधन की आवश्यकता महसूस होती है क्योंकि वर्तमान समय में जेल में कैदियों की संख्या क्षमता से अधिक है तथा कैदियों को पर्याप्त सुविधा नहीं मिल पा रही है एवं कर्मचारियों का भी अभाव है इसके साथ ही कोरोना जैसी ना जाने कितनी महामारी भविष्य में आ सकती हैं इसकी संभावना भी बनी हुई है तथा हाईकोर्ट में जमानत के कई केसेस पेंडिंग है एवं कई मामलों में फर्जी रिपोर्ट के आधार पर निर्दोष को गुनहगार कैदियों के संपर्क में आकर पथ भ्रष्ट होते हुए देखा गया है और जेल  के डर से ब्लैकमेलिंग भी होती है। इन सारी स्थितियों को देखते हुए वीरेंद्र सिंह ने कानून मंत्री को सुझाव देते हुए लिखा है कि जहां भी मानव शरीर को जान का खतरा ना हो प्रारंभिक गिरफ्तारी न्यायिक अथवा पुलिस ट्रायल चलने तक जमानती होना चाहिए ताकि व्यक्ति के दैहिक स्वतंत्रता का सम्मान प्राप्त हो इसलिए समझौता योग्य क्रिमिनल अपराधों को जमानती करने की मांग श्री सिंह द्वारा की गई है।

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