कोरबा। आज हमारे देश की आजादी की 74वीं वर्षगांठ है। और इस खास दिन कोरबा जिले के सुरेश कुमार निर्मलकर का जिक्र भी खास वजह से हो रहा है। बेरोजगारी से संघर्ष कर आजादी पाने वाले सुरेश कुमार निर्मलकर जिले और प्रदेश के युवाओं के बीच सामाजिक, आर्थिक स्वतंत्रता के लिए आइकॉन बन गए हैं। आज सुरेश ने सब्जी उत्पादन कर जिले के सब्जी व्यापारियों के बीच विशेष पहचान बना ली है। साल में लगभग 15-16 लाख रूपए का टर्न ओवर रखकर सब्जी उत्पादन करने वाले सुरेश कुमार के पतरापाली के 10 एकड़ खेत में आज 10 से 15 लोग लगातार काम कर रहे हैं। सुरेश ने कोरबा के डिग्री कॉलेज से आर्ट्स संकाय में स्नातक की डिग्री प्राप्त की है। खुद सुरेश बताते हैं कि डिग्री लेने के बाद रोजगार के लिए तीन साल ऑफिस-ऑफिस चक्कर लगाए। व्यवसाय के लिए लोन प्राप्त करने बैंको में गए, परंतु सब जगह सक्षमता और अनुभवहीनता के कारण बात नहीं बनी।
सुरेश कुमार छत्तीसगढ़ सरकार के उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के सम्पर्क में आए और उनकी बेरोजगारी की रात रोजगार के लम्बे दिनों में तब्दील हो गई। उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने सुरेश कुमार निर्मलकर को सब्जियों की खेती करने की सलाह दी और जरूरी तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया। विभाग के अधिकारियों ने इसके साथ ही उन्हें बीज-खाद, दवाई और अन्य जरूरी सामानों के रूप में भी सब्जी की खेती के लिए मदद की। शुरूआत में सुरेश कुमार निर्मलकर ने कोरबा विकासखण्ड के पतरापाली में लीड पर जमीन लेकर लगभग तीन एकड़ रकबे में खीरा, करेला और बरबट्टी की फसल लगाई थी। सब्जियों को कोरबा, कटघोरा, पाली सहित उपनगरीय क्षेत्र दीपका में भी बेचकर सुरेश को पूरे सीजन में इन तीनों फसलों से लगभग आठ लाख रूपए मिले थे। सुरेश स्वयं बताते हैं कि पहली बार मेहनत का फल चखा, मन खुश हो गया। खीरा लगभग एक लाख 82 हजार रूपए का, करेला लगभग तीन लाख रूपए का और बरबट्टी लगभग तीन लाख रूपए की बेची थी।
सब्जी उगाने से फायदे को देखते हुए सुरेश निर्मलकर ने इस काम को व्यवसाय के रूप में विकसित करने का फैसला किया और बेंदरकोना गांव में दस एकड जमीन लीज़ पर लेकर सब्जियों का व्यवसायिक उत्पादन शुरू किया। बीज-खाद, दवाई के साथ-साथ जमीन पर ट्यूबवेल खुदवाकर ड्रिप सिस्टम भी उद्यानिकी विभाग से सब्सिडी पर लेकर सुरेश ने बड़े पैमाने पर सब्जियों की खेती शुरू कर दी। इस काम में हाथ बंटाने के लिए सुरेश ने 10-15 स्थानीय लोगो को भी काम पर रख लिया। करेला, बरबट्टी, डोंड़का, लौकी जैसी बेलदार सब्जियों के लिए उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में नई-नई तकनीकों का प्रयोग भी सुरेश कुमार अपने खेत में कर रहे हैं। उन्होने अधिक फसल उत्पादन, सिंचाई की समन्वित तकनीक और खरपतवारों से फसल को बचाने के लिए मल्चिंग पद्धति भी सब्जी उत्पादन के लिए अपना ली है। आज सुरेश कुमार के खेत में लगभग 10 एकड़ रकबे में सब्जियां लगी है। समय-समय पर सब्जियों की तौड़ाई कर उन्हें कोरबा सहित कटघोरा और दीपका की मंडियों में बेचकर सुरेश कुमार हर साल 10 से 15 लाख रूपए का टर्न-ओवर रख कर रहे हैं। स्थानीय लोगो को रोजगार देने के साथ-साथ सुरेश कुमार पूरे जिले में सब्जी उत्पादन के लिए दूसरे लोगो को भी प्रेरित कर रहे हैं। सुरेश कुमार अपने इस व्यवसाय को निरंतर आगे बढ़ाने के प्रयास में लगे रहते हैं। वे अब कोरबा विकासखण्ड के ही गौड़ी गांव में ही तीन एकड़ जमीन और बुंदेली गांव में पांच एकड़ जमीन लीज पर लेकर बड़े पैमाने पर अलग-अलग सीजन में अलग-अलग सब्जियां उगाने की तैयारी कर रहे हैं।
सुरेश कुमार के सब्जी उत्पादन के बारे में वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी श्री दिनकर ने बताया कि सुरेश कुमार ने सब्जी उत्पादन के क्षेत्र में कोरबा जिले में बड़े इन्टरप्रेन्योर के रूप में अपनी पहचान बना ली है। सब्जियां उगाने के साथ-साथ उसकी मार्केटिंग और भण्डारण आदि के बारे में भी उनकी जानकारी अच्छी है। लोगो को ताजी सब्जियां उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्थानीय लोगो को रोजगार से जोडऩे की सुरेश की यह पहल निश्चित ही दूसरे लोगो के लिए प्रेरणादायी है।

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