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फोर्ब्स 2026 की ताजा रैंकिंग के अनुसार दुनिया में महिला अरबपतियों की संख्या पिछले साल के 406 से बढ़कर अब 481 हो गई है। रिटेल…
पिछले कुछ दिनों से देश के सर्राफा बाजार में सोने…
मारुति सुजुकी डिजायर भारतीय कार मार्केट की नयी क्रश बन…
केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों को दिवाली से पहले बड़ा उपहार दे रही है. केन्द्र सरकार…
दुर्ग। इस दीवाली देश-विदेश में भिलाई के गोबर के बने फ्लोटिंग दीये की विशेष रूप से डिमांड पैदा हुई है। गोबर के बने फ्लोटिंग दीये सुंदर तो हैं ही, देर तक पानी में तैरने की वजह से यह बहुत सुंदर नजारा प्रस्तुत करते हैं। यह इकोफ्रेंडली भी हैं इस वजह से देश भर में यह दीये बिक रहे हैं। इस संबंध में जानकारी देते हुए ऐसे दीये बनाने वाली संस्था उड़ान नई दिशा समूह की अध्यक्ष श्रीमती निधि चंद्राकर ने बताया कि कार्तिक पूजा और छठ में नदी और सरोवरों में दीये छोड़ने का नियम होता है। ऐसे में गोबर से बने दीये तैरते रहते हैं और पूरी नदी में बहुत सुंदर नजारा प्रस्तुत करते हैं। श्रद्धालु इन दीयों को बहते देर तक देखते हैं। उन्होंने बताया कि इसके अलावा यह दीये इको फ्रेंडली भी हैं। प्रकृति को नुकसान नहीं पहुंचाते। इसके साथ ही कांच के सुंदर बर्तनों में इन दीयों को सजायें तो पूजा का बहुत सुंदर वातावरण इनसे बनता है। उन्होंने बताया कि दीपावली को लेकर विशेष तरह की तैयारियां की गई हैं। देश भर में दीयों की अच्छी डिमांड आ रही है। उनके पास चंडीगढ़, अहमदाबाद, टाटा नगर और लखनऊ से भी आर्डर आये हैं। इसके अलावा विदेशों में इंग्लैंड और कनाडा से भी अच्छी डिमांड आई है। उन्होंने कहा कि हम लोग हमेशा नये तरह के प्रयोग करते हैं और इस बार भी दीयों की सजावट में विशेष रूप से कार्य किया गया है। …
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त्यौहारों से पहले आम आदमी पर महंगाई की मार जारी है. देशभर में पेट्रोल डीजल…
महासमुंद। फैंसी सामग्री (आईटम) की मांग आजकल हर जगह है। चाहे गांव हो, देहात हो या शहर हर जगह यह व्यवसाय चलता है। क्योंकि हर भारतीय लड़की या महिला जो कीमती गहनें या साज-सज्जा या मेकअप की सामग्री नहीं खरीद सकती वह साज-सज्जा की फैंसी सामग्री खरीदकर अपना शौक पूरा करती है। यह एक ऐसा व्यवसाय है जो अपने घर से ही शुरू कर सकते है। यह डोर-टू-डोर जाकर भी इन सामानों की बिक्री कर सकते है। यह व्यवसाय अन्य व्यवसाय की तुलना में ज्यादा तेजी से फैल रहा है।यह बात छोटे से गांव मोहंदी की घरेलू महिला श्रीमती भारती विश्वकर्मा बखूबी समझ चुकी थी। यह गांव महासमुन्द जिले के बागबाहरा में स्थित है। शादी के बाद श्रीमती भारती ने अपने आर्थिक स्थिति को और बेहतर बनाने के लिए स्व-सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने चक्रीय निधि (रिवॉल्विंग फंड) और सामुदायिक निवेश कोष (कम्युनिटी इनवेस्टमेंट फंड) से ऋण और किराए की दुकान लेकर फैंसी स्टोर्स खोला। धीर-धीरे उनकी दुकान चलने लगी। उन्होंने अपनी दुकान में महिलाओं के साज संवरने की सभी जरूरत की आर्टिफिशियल सामग्री रखी है। दुकान खोलने के कारण गांव की लडकियां और महिलाओं को उनकी संवरने की सभी साज-सामग्री इसी गांव में मिल जाती है। उसके लिए ग्रामीण महिलाओं को अब दूर शहर में अपने सामग्री खरीदने आना-जाना नहीं पड़ता है। इससे उनके समय और आने-जाने में होने वाले खर्च में भी बचत होती है।श्रीमती भारती कहती है कि बदलते हुए वक्त के साथ लोग की पसंद और फैशन भी बदलते है। ऐसे में वे अपनी दुकान पर सामग्री लाते समय इन बातों का ख्याल भी रखती है। वो कहती है कि इस दौर में किस सामग्री की आवश्यकता है या किन बनावटी गहनों की और सामानों को लोग ज्यादा पसंद कर रहें हैं और किन चीजों को नहीं। वो कहती है कि जो सामग्री चलन से बाहर हो गयी है वो अपनी दुकान में नहीं रखती। जिससे उन्हें ज्यादा घाटा भी नहीं होता। भारती ने बातों-बातों में बताया कि इस छोटे से गांव में भी चार-पांच हजार की सामग्री बेच लेती है। इससे उन्हें आर्थिक लाभ भी हो जाता है। उनकी शादी को 9 वर्ष बीत चुके है। नन्हें बच्चे है। पति रेशम केन्द्र में काम करते है।
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