छत्तीसगढ़ प्रादेशिक मानव संसाधन विकास समिति के प्रदेश प्रवक्ता सह अखिल भारतीय मानव अधिकार समिति के पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री (प्रभारी झारखंड राज्य) श्री बिरेंदर सिंह ने अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की मंगल कामनाएं देते हुए बताया कि मैं लगभग 20 वर्षों से सामाजिक संगठन में पदाधिकारी के रूप में कार्य कर रहा हूं ।मानव संसाधन समिति के वर्तमान प्रमुख तथा मानव अधिकार समिति के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष,विधि विभाग में अधिकारी श्री एस एन पटेल जी के सानिध्य में मैने मानवीय दृष्टिकोण के साथ जनसेवा में रक्त दान,पौधा रोपण,शरण में आए हुए को सामर्थ अनुसार सहायता ,सब का सम्मान,शासकीय योजनाओं का प्रचार प्रसार ,आदि कार्य करना सीखा है ।श्री सिंह ने बताया इस कालखंड में कांग्रेस तथा बीजेपी सरकार के केंद्रीय मंत्रियों के प्रसंशा पत्र मुझे प्राप्त हुए तथा प्रदेश में भी सभी पार्टियों के बड़े नेताओं और सामाजिक संगठन पदाधिकारियों का स्नेह प्राप्त हुआ तथा 20वर्षों का सामाजिक कार्यों का मेरा अनुभव यही कहता है की हम सब 26 जनवरी तथा 15अगस्त को अपने 1दिवसीय देश भक्ति का उत्सव न समझें,परंतु मानवीय भावना के साथ हमें यथासंभव सामर्थ अनुसार सदैव तत्पर रहना चाहिए,क्युकी मानवीय दृष्टिकोण से हममें एक दूसरे का सम्मान,सहायता करने की भावना,संगठात्मक शक्ति आदि आवश्यक तत्वों का आंतरिक विकास हमारे अंदर होता है।हम अपने आप को देश भक्त कहें और अपने ही राष्ट्र के अन्य भाषी बंधुओं के प्रति अनादर का भाव रखें तो ये नकारात्मकता है।अंतरराष्ट्रीय मातृ भाषा दिवस हमें अपने श्रेत्रिय मातृ भाषा तथा राष्ट्रीय भाषा के साथ साथ सभी भाषाओं का सम्मान करना सिखाता है और रुचि अनुसार कई लोग कई भाषाओं को सीखते भी हैं तथा ट्रांसलेटर के रूप उपयोगी भी बन जाते हैं,राष्ट्र तब तक मजबूत नहीं होगा जब तक हम मानवीय दृष्टिकोण के साथ जीने की कला को नही अपनाते,जिसके न सिर्फ स्वयं की प्रगति अपितु राष्ट्र की प्रगति भी प्रत्येक क्षेत्र में होगी क्युकी सशक्त देश होगा तो ही सशक्त प्रदेश होगा,तथा हमारा राष्ट्र सही मायनों में विश्व गुरु है,तथा सदैव रहेगा।
15अगस्त 26जनवरी केवल 1दिवसीय देश भक्ति का उत्सव नहीं :मानव संसाधन विकास समिति
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