आज 4 मार्च को प्रदर्शन कर कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपें पेंशनर्स

भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ प्रदेश के आव्हान पर राज्य में पहली बार पेंशनर्स आज सोमवार 4 मार्च 24 को भोजन अवकाश के समय दोपहर 1:30 बजे कलेक्टरेट रायपुर में जुलाई 23 से केन्द्र के समान बकाया 4% महंगाई राहत देने और पेंशनरों के आर्थिक भुगतान में बाधक मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 49(6)को विलोपित करने की 2 सूत्रीय मांग को लेकर प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मांग पूर्ति का आग्रह करेंगे। आज के आंदोलन के बाद भी राज्य सरकार यदि हमारी मांगे पूरी नहीं करती तो देश भर के पेंशनर के साथ आगामी 20 मार्च को जंतर मंतर नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ राज्य के पेंशनर्स भी प्रदर्शन में शामिल होकर केन्द्र सरकार के सामने राज्य सरकार से दोनो मांग पूरा कराने की मांग की जाएगी। आज के प्रदर्शन में पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ प्रदेश के प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव,कार्यकारी अध्यक्ष जे पी मिश्रा, महामंत्री अनिल गोलहनी, लोचन पांडेय, बी एस दसमेर,नरसिंग राम, प्रवीण त्रिवेदी, एम एन पाठक, पी आर काटोलकर, आर के नारद, पी एल सिंह,सोमेश्वर प्रसाद तिवारी,अनिल पाठक, व्ही टी सत्यम,ओ डी शर्मा,सी एल चंद्रवंशी, मो.शकील, एस सी भटनागर,आर के पांडेय, राजेंद्र तिवारी, नारायण साहू,संतराम धीवर,आर के सोनी,यू एस साहू, हरेंद्र चंद्राकर, पी सी सक्सेना, फत्तेराम सिन्हा, के व्ही आयंगर, भी आर कुर्रे,आदि शामिल रहे। उक्त जानकारी जारी विज्ञप्ति में पेंशनर्स महासंघ छत्तीसगढ़ प्रदेश जिला शाखा रायपुर के अध्यक्ष पं.आर जी बोहरे ने दी है।
जारी विज्ञप्ति में आगे बताया गया है कि विधानसभा चुनाव के पूर्व से केन्द्र सरकार द्वारा घोषित 4% डीआर जुलाई 23 से बकाया है। भूपेश सरकार द्वारा इसे रोक कर रखा गया था अंतिम समय आदेश जारी नही किया।जिसका खामियाजा उन्हें चुनाव में हार कर भुगतना पड़ा और पेंशनरों ने इसे लेकर कांग्रेस सरकार का खुलकर विरोध किया था। उसी दौरान डा रमन सिंह सहित अनेक शीर्षस्थ भाजपा नेताओं ने इस मुद्दे पर कांग्रेस सरकार को कटघरे में खड़ा किया था और वायदा किया था कि भाजपा की सरकार बनने पर कर्मचारियों और पेंशनरों को केंद्र के समान देय तिथि से डीए डीआर दिया जाएगा। ये बात मोदी गारंटी वाली चुनावी घोषणा संकल्प पत्र में भी है, परंतु कर्मचारी और पेंशनर संगठनों के बार बार आग्रह के बाद भी भाजपा सरकार की इस मुद्दे पर चुप्पी से कर्मचारियों और पेंशनरों में भारी असंतोष है और लगातार सरकार से चर्चा पर्चा के बाद मजबूर होकर आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है। इसी तरह 23 वर्षो से लम्बित मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 49 के कारण डीआर सहित अन्य सभी आर्थिक भुगतान में मध्यप्रदेश राज्य सरकार की सहमति की अनिवार्यता बनी हुई है। इसे विलोपित करने की मांग पर शासन की रुचि नहीं दिखाई देता जिसके कारण राज्य के पेंशनर्स परेशान है। इसलिए मजबूर होकर आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।

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