छत्तीसगढ़ राज्य के अलग-अलग आठ जिलों के शिक्षकों द्वारा बच्चों के नैतिक गुणवत्ता और नैतिक शिक्षा प्रदान करने हेतु एक योजना बनाकर बच्चों में नैतिक गुणों का विकास और उनके मनोरंजन के लिए 50 नैतिक शिक्षा पर आधारित कहानियों को स्वयं लिखा । इन कहानियों को हिंदी में पहले लिखा गया फिर इनको छत्तीसगढ़ी और अंग्रेजी भाषा में अनुवाद भी किया। ताकि बच्चे रोचक ता के साथ कहानियों को पढ़ें और नैतिक ज्ञान के साथ उनका मनोरंजन हो। इस पुस्तक को बनाने का उद्देश्य यह था कि यह पुस्तक शिक्षा और नैतिक नियमों को समझने और सीखने में बच्चों की सहायता करेगी। इन शिक्षाप्रद कहानी के माध्यम से बच्चों में नेतृत्व, सहयोग, समर्पण, और सहानुभूति जैसी मूल्यों का विकास होगा । इसके अलावा, यह कहानियाँ उन्हें समस्याओं को हल करने के विभिन्न तरीकों को समझाती हैं और उन्हें समाधान तक पहुंचाने में मदद करती हैं। इस पुस्तक के माध्यम से, बच्चों की रचनात्मकता को बढ़ावा दिया जा सकता है और उन्हें विश्वास और स्वाभाविक विकास के लिए प्रेरित किया जा सकता है। इस तरह, यह पुस्तक बच्चों के शिक्षा और मनोवैज्ञानिक विकास को समर्थन प्रदान करती है और उन्हें समाज में अच्छे नागरिक बनने के लिए प्रेरित करती है।इसमें लिखी गई कहानिया अनुभव और वास्तविकता आधारित भी इन पुस्तकों के निमार्ण में दुर्ग जिले की शिक्षिका सुश्री के.शारदा , बेमेतरा जिले से श्रीमती ज्योति बनाफर , सक्ति जिले से श्री पुष्पेंद्र कुमार कश्यप ,महासमुंद जिले से श्री रिंकल बग्गा , बिलासपुर जिले से श्री चरण दास महंत सहायक शिक्षक, रायपुर जिले से श्रीमती अनुरिमा शर्मा (व्याख्याता), खैरागढ़ जिले से श्रीमती निहारिका झा और वेदप्रकाश दिवाकर शिक्षक सक्ति जिले से शामिल हुए |अप्रैल माह में 15 दिन में ही ये तीन भाषाओं में कहानियों को लिख कर बच्चों तक पहुंचने का कार्य स्वयं प्रेरित होकर किये है। ये सभी शिक्षक गण कोरोंना काल में भी नित नवाचार प्रयास कर अपना योगदान स्कूल शिक्षा में दे चुके हैं

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