जालंधर। इंटरनेशनल जर्नल ऑफ रिसर्च इन मेडिकल साइंसेज में प्रकाशित अपने 2022 के अध्ययन का हवाला देते हुए, डॉ. पुरोहित ने खुलासा किया कि पंजाब में लगभग 67 प्रतिशत नर्सें अवसाद से पीड़ित हैं। उन्होंने कहा, ‘इसके अलावा, नर्सों को भारी काम के बोझ, अनियमित कार्यसूची, खराब कार्य वातावरण और कठिन मरीजों के कारण भी अस्पतालों में समस्याओं का सामना करना पड़ता है।’ उन्होंने बताया कि अपने कार्य शेड्यूल के सामने, नर्सें कम वेतन महसूस करती हैं।

पंजाब में फरीदकोट स्थित बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज, स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के विजिटिंग प्रोफेसर डॉ. नरेश पुरोहित ने कहा कि डब्ल्यूएचओ के 34.5 नर्सों के मानदंड को पूरा करने के लिए भारत को 1.37 मिलियन नर्सों और दाइयों की भर्ती की आवश्यकता होगी। डॉ. पुरोहित अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस के अवसर पर उत्तर रेलवे के फिरोजपुर स्थित मंडल रेलवे अस्पताल द्वारा रविवार को आयोजित सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम में मुख्य भाषण दे रहे थे।

उन्होंने कहा कि देश में नर्सों की बारहमासी कमी स्वास्थ्य देखभाल की खराब गुणवत्ता में योगदान करती है। साल 2020 में, भारत में प्रति दस हजार व्यक्तियों पर केवल 24.5 नर्सें और दाइयां थीं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में विषम सरकारी नर्सिंग सेवा नीतियों के कारण पदनाम में ठहराव, सीमित भर्तियां, मनमानी प्रतिनियुक्तियां, करियर को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरणा की कमी और महत्वपूर्ण रूप से सम्मान की कमी हो गई है। उन्होंने कहा कि नर्सें जो अस्पतालों में मरीजों के साथ संवाद करने, उन्हें समझने और दवा देने के साथ-साथ उनकी देखभाल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, वे अभी भी गुमनाम नायक हैं।

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