भगवान जगन्नाथ की भूमि ओडिशा सालों बाद बड़े राजनीतिक बदलाव के लिए तैयार है. ओडिशा विधानसभा में पहली बार बीजेपी की सरकार बनती दिख रही है. राज्य की 147 विधानसभा सीटों के लिए हो रही मतगणना के ताजा रुझानों के अनुसार राज्य में भारतीय जनता पार्टी सरकार बनाती दिख रही है. बीजेपी का ओडिशा के लोकसभा सीटों में भी शानदार प्रदर्शन दिख रहा है. ओडिशा की 21 सीटों में से 19 सीटों पर बीजेपी आगे है, जबकि बीजेडी मात्र 1 सीट पर आगे दिख रही है. कांग्रेस भी 1 सीट पर आगे है.
ताजा अपडेट के मुताबिक बीजेपी 74 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. बीजेपी को उत्तर ओडिशा में बढ़त मिली है. पार्टी उत्तर ओडिशा में शानदार प्रदर्शन करती दिख रही है. बीजेपी को ओडिशा के बारगढ़, कालाहांडी, बालंगीर, पुरी, संभलपुर और क्योंझर में बढ़त मिलती दिख रही है.
ओडिशा में सरकार बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा 74 है. 2019 के विधानसभा चुनाव में बीजेडी को 113 सीटों पर जीत हासिल हुई थी. जबकि 23 सीटें जीतकर बीजेपी मुख्य विपक्षी पार्टी बनी थी.
मतगणना के ताजा रुझान बताते हैं कि 5 मार्च 2000 को पहली बार ओडिशा के सीएम पद की शपथ लेने वाले नवीन पटनायक 24 साल बाद सीएम की कुर्सी गंवा रहे हैं. ताजा रुझानों में बीजेडी को 147 सदस्यों वाली विधानसभा में 57 सीटे मिलती दिख रही है.
कांग्रेस को ओडिशा में 13 सीटें मिलती दिख रही है, राज्य में सीपीएम को 1 सीटें मिलती दिख रही है. 2 निर्दलीय उम्मीदवार भी ओडिशा में विजयी होते नजर आ रहे हैं.
अगर ओडिशा में आंकड़ों का यही ट्रेंड रहता है तो बीजेपी राज्य में पहली बार सरकार बनाएगी. चुनाव प्रचार के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी बार बार दोहरा रहे थे कि 10 जून को ओडिशा में बीजेपी का मुख्यमंत्री सत्ता पर काबिज होगा. मतगणना के अबतक के रुझान पीएम मोदी के दावों के अनुसार ही दिख रहे हैं.
बता दें कि नवीन पटनायक कभी एनडीए का ही हिस्सा हुआ करते थे. लेकिन 2009 में उन्होंने एनडीए से राहें जुदा कर ली थी. इसके बाद वे ओडिशा में अपने दम पर सरकार चला रहे थे. लेकिन एनडीए से उनके संबंध हमेशा ही सौहार्द्रपूर्ण और सहज रहे. इस बार चुनाव से पहले एक बार फिर चर्चा चली कि नवीन पटनायक एनडीए के पाले में आ सकते हैं, लेकिन सीट बंटवारे पर बात न बनने की वजह से दोनों पार्टियों की दोस्ती परवान नहीं चढ़ पाई.
ओडिशा में चुनाव प्रचार के दौरान पीएम मोदी ने नवीन पटनायक पर हमला किया था. पीएम मोदी ने एक रैली में कहा था कि ‘आप नवीन बाबू को कहीं खड़े कर दीजिए और उनको बिना कागज लिए कहिए कि आप ओडिशा के जिलों के नाम बोलिए और जिलों के कैपिटल के नाम बोलिए. जो मुख्यमंत्री अपने जिलों के नाम बोल नहीं सकते. जो मुख्यमंत्री अपने जिलों के नाम नहीं जानते, वो आपके दुख दर्द जानते होंगे क्या? क्या उनके भरोसे आप अपने बच्चों को भविष्य छोड़ सकते हैं क्या?”
पीएम मोदी ने प्रचार अभियान के दौरान कहा था कि, ‘इसलिए मैं कहता हूं, ज्यादा नहीं मुझे पांच साल मौका दीजिए. अगर मैं पांच साल में आपके ओडिशा को नंबर वन ना बना दूं न तो कहना कि मोदी क्या कहकर गया था?’
इसके अलावा बीजेपी ने नवीन पटनायक के करीबी पूर्व आईएएस वीके पांडियान पर हमला किया था. पांडियान नवीन पटनायक के विश्वस्त सलाहकार हैं. हाल ही में चुनाव प्रचार के दौरान जब नवीन पटनायक भाषण दे रहे थे तो उनके हाथ हिल रहे थे, इस दौरान पांडियान उनके हाथ को संभालते नजर आए थे. पीएम मोदी ने इस मुद्दे पर भी नवीन पटनायक पर निशाना साधा था और पूछा था कि 1 साल में नवीन पटनायक की तबीयत इतनी ज्यादा कैसे खराब हो गई. गृहमंत्री अमित शाह ने भी एक रैली में कहा था, ‘नवीन बाबू की तबियत सही नहीं है. वो सरकार नहीं चला रहे हैं, बल्कि तमिल बाबू इसे चला रहे हैं.’
वहीं सीएम नवीन पटनायक ने ओडिया अस्मिता का सवाल उठाया था. नवीन पटनायक ने कहा था कि मेरा कहना है कि ओडिशा के लोग चौबीस साल से यह बात अच्छे तरीके से जानते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री जी आप ओडिशा को कितना जानते हैं. ओडिया भाषा क्लासिकल भाषा होने के बाद भी इसे भूल गए. नवीन पटनायक ने आरोप लगाया था कि आपने एक हजार करोड़ संस्कृत भाषा के लिए दिए लेकिन ओडिया के लिए कुछ नहीं दिया.
बता दें कि राज्य की 147 सीटों पर चार चरणों में वोट डाले गए थे. इस बार 2.5 करोड़ से अधिक मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया. यहां 74.44 प्रतिशत मतदान हुआ था, जबकि 2019 में 73.09 प्रतिशत मतदान हुआ था.

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