एक ई-मेल ने कई लोगों की नींद उड़ा रखी है। लोगों तक दिल्ली पुलिस के नाम से नोटिस भेजा रहा है। इसमें कहा जा रहा है कि सर्विलांस यूनिट ने चाइल्ड पोर्नोग्राफी से जुड़े कंटेंट को वायरल करते हुए ट्रेस किया है। ऐसे में 24 घंटे के भीतर संपर्क करने को कहा जाता है। वहीं यह भी कहा जा रहा है कि 24 घंटे के भीतर बाहर भी सेटलमेंट कर सकते हैं। दरअसल, ठग अब नए पैंतरे आजमा रहे हैं। इसकी शिकायत साइबर सेल में पहुंची है। पुलिस ने नोटिस की पड़ताल की तो वह फर्जी निकला।
ऐसे होता है फेक नोटिस

एक व्यक्ति के नाम की फेक आईडी से नोटिस भेजा जाता है। इसमें सीबीआई, साइबर सेल इंडिया और भारत सरकार का लोगो होता है। फर्जी ई-मेल के माध्यम से लोगों को कहा जाता है कि आपने नाबालिग बच्चे की तस्वीर वायरल की है। पॉक्सो एक्ट के तहत आप पर कार्रवाई की जा सकती है।
साथ ही कहा जाता है कि मामला दर्ज करने से पहले हमने निजी तौर पर आपसे संपर्क करने का निर्णय लिया। आप 24 घंटे के अंदर जवाब दें। नहीं तो आप पर कार्रवाई हो सकती है। इस तरह साइबर अपराधी मामले को रफा-दफा करने के नाम पर लोगों से पैसे मांगने की धमकी दे रहे हैं।

केस 01

रायपुर के अभिषेक बघेल ने बताया कि उनकी कंपनी के मेल आईडी में चाइल्ड फोर्नोग्राफी को लेकर मेल किया है। उन्हें iib-interpol @ fuenterrobles.es मेल आइडी से मेल किया गया। उसमें एक लेटर भी था, जिसमें लिखा गया कि चाइल्ड पोर्नोग्राफी के केस में फंस रहे हैं। इस तरह एक सप्ताह में उनके पास अलग-अलग आइडी से दो मेल किए गए। हालांकि उन्होंने जब साइबर एक्सपर्ट से बात की तो पता चला कि फर्जी लेटर है।

केस 02

व्यापारी नितिन वर्मा ने बताया कि उनके पास मेल किया गया। मेल को पढ़ने के बाद वह घबरा गए। इसके बाद उन्होंने पूर फोन चेक किया। मेल पर ही जवाब देने और मामला सेटल करने कहा गया। हालांकि दुबारा किसी का फोन मैसेज नहीं अया।

इस तरह से करें बचाव

– अनजान ई-मेल को इग्नोर करें, जरूरत हो तो संबंधित विभाग से वेरिफाई करें।

– फोन पर बात करते समय अपनी निजी जानकारी देने से बचें।

– फ्राड होने पर अपने पास के साइबर पुलिस स्टेशन को शिकायत करें।

– 1930 या www.cybercrime.gov.in पर भी रिपोर्ट करें।

सीधे पुलिस करती है कार्रवाई

– चाइल्ड पोर्नोग्राफी के मामले में गृह मंत्रालय द्वारा पुलिस हेड क्वार्टर और साइबर सेल को मैसेज जाता है। जहां से यह अपलोड किया जाता है उसकी पूरी जानकारी रहती है। इसके बाद संबंधित पुलिस थाने में भेजा जाता है और पुलिस गिरफ्तार करती है।

रायपुर रेंज साइबर प्रभारी मनोज नायक ने कहा, साइबर अपराधियों के इस नए हथकंडे से लोगों को पहले भी जागरूक किया गया है। पुलिस की तरफ से ऐसा कोई नोटिस किसी को भी नहीं भेजा जाता है। यह लीगल नोटिस फेक होते हैं। फेक नोटिस से डरें नहीं। न ही आनलाइन पैसे ट्रांसफर करें। मुमकिन हो तो अपने कंप्यूटर, लैपटाप को एंटीवायरस से क्लीन करें।

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