रायपुर। मध्यप्रदेश की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में परिवहन बैरियर (जांच चौकी) बंद किए जाएंगे। राज्य की सीमा पर 15 बैरियर हैं। इनसे राज्य में आने और यहां से बाहर जाने वाले कमर्शियल वाहनों के फिटनेस, परमिट और ओवरलोडिंग की जांच होती है। इन्हें बंद करने के लिए गुजरात और मध्यप्रदेश के परिवहन मॉडल को परखा जा रहा है। महाराष्ट्र समेत अन्य बड़े राज्यों का सिस्टम भी देखा जा रहा है, जहां चेकपोस्ट चालू हैं। अभी बैरियर और फ्लाइंग स्कॉट से छत्तीसगढ़ को 200 करोड़ से ज्यादा का राजस्व मिल रहा है। आगे बैरियर हटाकर मोबाइल यूनिट से जांच की जाएगी। केंद्र ने 3 साल पहले छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, प. बंगाल, आंध्र, राजस्थान समेत 13 राज्यों के प्रमुख सचिवों को पत्र भेजा था। उसमें कहा था कि जीएसटी लागू होने से अंतरराज्यीय सीमाओं पर स्थायी जांच चौकी की जरूरत नहीं बची है। वाहनों का पूरा ब्योरा अब ऑनलाइन उपलब्ध है। ज्यादातर राज्यों ने बैरियर हटा लिया है। ऐसे में उक्त सभी 13 राज्यों को भी बैरियर हटाना चाहिए। इस बारे में परिवहन मंत्रालय को सूचित करें। छत्तीसगढ़ में जिन चेकपोस्ट को हटाया जाना है, उनमें पाटेकोहरा, छोटा मानपुर, मानपुर, चिल्फी, खम्हारपाली, बागबाहरा, केंवची, धनवार, रामानुगंज,चांटी, घुटरीटोला, रेंगारपाली, शंख, लावाकेरा, कोन्टा और धनपूंजी शामिल हैं। चेकपोस्ट हटे तो बिना परमिट वाले वाहनों के दौड़ने की आशंका आशंका जताई जा रही है कि चेकपोस्ट हटने से वाहनों के फिटनेस-परमिट की जांच का सिस्टम गड़बड़ा जाएगा। अभी चेकपोस्ट के डर से ट्रांसपोर्टर वाहनों के फिटनेस और परमिट नियम का पालन करते हैं। ये बंद होने से बिना परमिट वाले वाहन दौड़ने लगेंगे। गाड़ियों का फिटनेस कराने में भी लोग मनमानी करेंगे। इसके साथ ही हादसे का खतरा बढ़ेगा। हालांकि रमन सरकार ने अपने कार्यकाल के आखिर में राज्य के बैरियर हटा दिए थे। तब सरकार को 400 करोड़ रुपए सालाना का राजस्व नुकसान हुआ था। यही वजह थी कि भूपेश सरकार ने इसे फिर शुरू किया। इस बारे में परिवहन अधिकारियों का कहना है कि बैरियर हटाने का फैसला सरकार के स्तर का मामला है। मुझे जानकारी नहीं है। बैरियर बंद लेकिन मोबाइल यूनिट चालू मध्यप्रदेश में सीमावर्ती जिलों में 47 बैरियर थे। इसमें 41 स्थाई और 6 अस्थाई बैरियर थे। इन्हें बंद तो किया गया, लेकिन गुजरात के सिस्टम को अपनाया गया। 47 बैरियर बंद कर 94 मोबाइल यूनिट चालू कर दी गई। दो राज्यों के बैरियर में राजस्व में अंतर छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र बॉर्डर पर दोनों राज्यों के बैरियर हैं। छत्तीसगढ़ के पाटेकोहरा से सरकार को 4 करोड़ रुपए राजस्व मिल रहा है, जबकि देवरी से महाराष्ट्र सरकार को 1 करोड़ मिल रहे हैं। इसी तरह मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ सीमा के बैरियर से सरकार को डेढ़ करोड़ राजस्व मिल रहा है। जबकि एमपी को 25 लाख रुपए ही मिल रहे हैं। छत्तीसगढ़ में यही सिस्टम लॉन्च करने पर मैनपावर की ज्यादा जरूरत होगी, क्योंकि मोबाइल यूनिट अस्थाई है और ये 24 घंटे तैनात रहेगी। टोल प्लाजा भी बंद करने पर विचार केंद्र के निर्देश पर सरकार टोल प्लाजा बंद करने पर भी विचार कर रही है। सरकार पता कर रही कि कैसे नया सिस्टम बनाया जा सकता है। क्योंकि सड़क पीपीपी(निजी संस्थाओं और एजेंसी) के सहयोग से बनायी जा रही है। टोल वसूली बंद की गई तो सड़क निर्माता एजेंसी को लागत की भरपाई का पैसा सरकार को देना होगा। खास बात ये है कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का जोर चेकपोस्ट बंद करने पर है। पर महाराष्ट्र में अब तक बैरियर बंद नहीं किए गए हैं। फ्लाइंग स्कॉट भी है। ये है 16 बैरियर पाटेकोहरा, छोटा मानपुर व मानपुर (राजनांदगांव), चिल्फी (कबीरधाम), खम्हारपाली और बागबाहरा (महासमुंद), केंवची (बिलासपुर), धनवार व रामानुगंज (बलरामपुर), घुटरीटोला और चांटी (कोरिया), रेंगारपाली (रायगढ़), शंख व उप जांच चौकी लावाकेरा (जशपुर), कोंटा (सुकमा) और धनपूंजी (बस्तर)।

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