रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने मुद्रांक प्रकरणों के शीघ्र और सुगम निराकरण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब प्रथम अपीलीय अधिकारी के रूप में संभागायुक्त के स्थान पर महानिरीक्षक पंजीयन को नियुक्त किया गया है। राज्य शासन द्वारा 27 अगस्त को इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई है, जिसका उद्देश्य पक्षकारों को सहूलियत प्रदान करना और मुद्रांक प्रकरणों का त्वरित निपटारा करना है। इससे अवरुद्ध राजस्व की वसूली समय पर हो सकेगी और शासन के राजस्व में वृद्धि भी होगी।
मुद्रांक प्रकरणों का निराकरण और अपील प्रक्रिया
पंजीयन कार्यालयों में पंजीयन के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों पर स्टाम्प शुल्क और पंजीयन फीस लगाई जाती है। कई बार दस्तावेजों में कर अपवंचन की मंशा से बाजार मूल्य से कम प्रतिफल अंकित किया जाता है, जो न्यून मूल्यांकित दस्तावेज की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में कलेक्टर ऑफ स्टाम्प द्वारा भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा 47(क) के तहत प्रकरण दर्ज कर कम स्टाम्प शुल्क की वसूली के आदेश दिए जाते हैं।
यदि कलेक्टर द्वारा पारित आदेश से पक्षकार संतुष्ट नहीं होते हैं, तो अधिनियम की धारा 47(क)(4) के तहत एक माह के भीतर अपील का प्रावधान है। पहले, इस अपील को संभागीय आयुक्त को प्रस्तुत किया जाता था, जबकि द्वितीय अपील का अधिकार मुख्य नियंत्रक राजस्व प्राधिकारी के पास था।
राजस्व वसूली में तेजी का प्रयास
मुद्रांक प्रकरणों के निराकरण के लिए पहले कोई निश्चित समय सीमा निर्धारित नहीं थी, जिससे मामले लंबित रहते थे और राज्य का राजस्व अवरुद्ध होता था। इस समस्या को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने अब प्रथम अपील का अधिकार महानिरीक्षक पंजीयन को सौंपने का निर्णय लिया है। इस निर्णय से मुद्रांक मामलों के त्वरित समाधान और समय पर राजस्व वसूली की उम्मीद की जा रही है। राज्य सरकार की यह अधिसूचना 27 अगस्त 2024 को राजपत्र में प्रकाशित की गई है।

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